Tuesday, 7 April 2026

“रोज़गार की तलाश में शुरू हुआ सफर, कब समाज सेवा का संकल्प बन गया—पता ही नहीं चला।”

संजय शर्मा
जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता | समुदाय संगठक | जन-अधिकार एवं वकालत सहयोगी
मुख्य प्रेरक पंक्ति 
“रोज़गार की तलाश में शुरू हुआ सफर, कब समाज सेवा का संकल्प बन गया—पता ही नहीं चला।”
संक्षिप्त परिचय 
लगभग तीन दशकों से **Sanjay Sharma का जीवन समाज के हाशिए पर खड़े लोगों, ग्रामीण समुदायों, आदिवासी समाज और जमीनी संगठनों के साथ जुड़कर काम करने में बीता है।
उनकी यात्रा किसी बड़े सपने, पद या योजना से नहीं, बल्कि संघर्ष, ज़िम्मेदारी, जीवन के अनुभव और लोगों के प्रति संवेदनशीलता से शुरू हुई।
उन्होंने न केवल लोगों की समस्याओं को समझा, बल्कि उनके साथ खड़े होकर आवाज़, संगठन, नेतृत्व और अधिकार की दिशा में काम किया।
संघर्ष, सेवा और सामाजिक बदलाव से भरी एक जीवन-यात्रा
संजय शर्मा की यात्रा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सच्चा सामाजिक परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से आता है—जीवन के अनुभवों से, संघर्षों से, और लोगों के साथ बने रिश्तों से।
वर्ष 1994 में, जब वे स्वयं छात्र थे और पढ़ाई के साथ-साथ आजीविका की तलाश कर रहे थे, तभी उन्हें पहली बार एक संस्था में काम करने का अवसर मिला। यह उनके लिए केवल एक नौकरी थी, लेकिन धीरे-धीरे वही काम समाज के लिए समर्पण में बदलता चला गया।
परिवार के अपने संघर्षों और कानूनी लड़ाइयों ने उन्हें बहुत पहले ही यह सिखा दिया था कि आम लोगों की समस्याएँ केवल कागज़ों से हल नहीं होतीं—उनके लिए संवाद, वकालत, समझ, साहस और लगातार साथ खड़े रहने की जरूरत होती है।
इसी अनुभव ने उन्हें जन-अधिकार, प्रशासनिक संवाद और सामाजिक वकालत के क्षेत्र में मजबूत बनाया।
जब जिम्मेदारी ने जीवन की दिशा बदल दी
सामाजिक क्षेत्र में शुरुआती दिनों में ही उन्होंने संस्था निर्माण का कठिन और वास्तविक चेहरा देखा।
साथियों के साथ मिलकर संस्था बनाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियों, गलत फैसलों और भरोसे के टूटने ने उस कोशिश को बिखेर दिया।
यह अनुभव आसान नहीं था।
लेकिन यहीं से उन्होंने जीवन का एक गहरा सबक सीखा—
“संस्था केवल पंजीयन और परियोजनाओं से नहीं बनती, बल्कि भरोसे, मूल्यों, ईमानदारी और सामूहिक जिम्मेदारी से बनती है।”
यही सीख आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
कानून से समाज तक—और समाज से लोगों तक
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने न्यायालय में भी कार्य किया।
इस दौरान उन्हें न्याय व्यवस्था, लोगों की समस्याओं, अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और गहराई से समझने का अवसर मिला।
लेकिन उनका मन केवल पेशे तक सीमित नहीं रहा।
वर्ष 1997 में उन्होंने फिर से साथियों के साथ एक नई संस्था खड़ी करने का साहस किया।
शुरुआत बहुत छोटी थी—न संसाधन, न बड़े सहयोगी, न कोई आसान रास्ता।
फिर भी धीरे-धीरे छोटे अवसरों, छोटे अनुदानों और लगातार मेहनत के सहारे काम आगे बढ़ता गया।
यहीं से उनका जीवन केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा—
यह लोगों के साथ चलने, उनकी आवाज़ को मंच देने और जमीनी बदलाव का हिस्सा बनने की यात्रा बन गया।
लोगों के साथ, लोगों के बीच
पिछले लगभग 30 वर्षों में उनका कार्य मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से जुड़ा रहा है—
ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के साथ काम
जन-अधिकार एवं वकालत
समुदाय संगठन और नेतृत्व निर्माण
जमीनी संस्थाओं को मजबूत करना
प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास
दस्तावेज़ीकरण, रिपोर्ट लेखन और जन-संवाद
सामाजिक मुद्दों को प्रशासन और नीति स्तर तक ले जाना
उनकी सबसे बड़ी पहचान यह नहीं कि उन्होंने कितने प्रोजेक्ट किए—
बल्कि यह है कि उन्होंने कितने लोगों का भरोसा जीता और कितने संघर्षों में साथ खड़े रहे।
बीमारी, विराम और फिर वापसी
वर्ष 2012 के आसपास स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों ने उनकी यात्रा को अचानक रोक दिया।
जिस संस्था को उन्होंने वर्षों की मेहनत से खड़ा किया था, वह भी धीरे-धीरे कमजोर होकर बंद हो गई।
यह केवल काम का नुकसान नहीं था—
यह जीवन के एक बड़े हिस्से के टूटने जैसा था।
लेकिन यहीं उनकी जिजीविषा सामने आई।
कई वर्षों की कठिनाई, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य-संघर्ष के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे फिर से खुद को संभाला, और सामाजिक क्षेत्र में अपनी सक्रियता दोबारा शुरू की।
आज भी जारी है सफर
आज भी वे सीमित संसाधनों के बावजूद समाज के बीच सक्रिय हैं।
वे विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर प्रशिक्षण, दस्तावेज़ीकरण, वर्कशॉप, क्षमता विकास और सामाजिक पहल में योगदान दे रहे हैं।
वर्तमान में वे विशेष रूप से जुड़े हैं—
वर्तमान कार्यक्षेत्र
ग्राम अधिकार मंच को पुनर्जीवित करने में
जमीनी मुद्दों पर वकालत और जन-संवाद में
ग्रामीण व सामाजिक संगठनों की क्षमता वृद्धि में
सकारात्मक बदलाव की कहानियों को सामने लाने में
दस्तावेज़ीकरण, रिपोर्ट लेखन और प्रशिक्षण सहयोग में
एक सच्चाई, जो अक्सर दिखाई नहीं देती
समाज सेवा के पीछे एक व्यक्तिगत संघर्ष भी चलता है—
जिसे लोग अक्सर देख नहीं पाते।
आज भी वे अपने व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए
रिपोर्ट लेखन, दस्तावेज़ीकरण, प्रशिक्षण, संसाधन व्यक्ति और सलाहकार कार्यों के माध्यम से आय अर्जित करते हैं।
यह आय नियमित नहीं होती।
कभी काम होता है, कभी कई महीनों तक नहीं होता।
फिर भी वे डटे हुए हैं।
क्योंकि अब यह केवल काम नहीं रहा—
यह उनका जीवन-संकल्प बन चुका है।
समापन प्रेरक पंक्ति
“उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि बदलाव हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं आता—कई बार वह केवल हौसले, ईमानदारी और लोगों के साथ खड़े रहने की जिद से शुरू होता है।”

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