योजना का नाम - लाख पालन (उत्पादन)
हितग्राही की पात्रता - ऐसे समस्त ग्रामीण जिनके पास कुसुम, बेर, एवं पलास के वृक्ष है ।
ऐसे ग्रामीण जो जन सहभागिता से शासकीय भूमि में।कुसुम , बेर, पलाश वृक्षो का संरक्षण करने वाले स्वंय सहायता समूह के सदस्य हों ।
योजना का उद्देश्य - लाख उत्पादन में वृद्धि करना एवं कृषकों को उसका उचित मूल्य दिलाना। लाख के पालक वृक्षो का संरक्षण करना एवं उनकी संख्या में वृद्धि करना । ग्रामीणों को आय के अतिरिक्त स्रोत का विकास करना ।ब्रूड लाख फार्म की स्थापना कर बीहन लाख की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
योजना का लाभ - परम्परागत पद्धति से की जा रही लाख की खेती को वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षित करना जिससे लाख के उत्पादन में वृद्धि होगी एवं ग्रामीणों की आय में वृद्धि तथा वृक्षो का संरक्षण होगा । ग्राम स्तर, हाट बाजार एवं प्रसंस्करण स्तर पर स्वंय सहायता समूहों का गठन किया जावेगा एवं चक्रीय राशि एवं ऋण उपलब्ध कराया जाएगा ।
लाभ प्राप्त करने के चरण - प्रथम चरण में हितग्राहियों को लाख पालन के वैज्ञानिक विधि का प्रशिक्षण दिया जाता है पालक वृक्षो की कटाई - छटाई करते है । बीहन लाख प्रदाय किया जाता है जिसे पालक वृक्षो पर बांधते है तथा उनकी लाख उतार लेते है तथा विक्रय कर लाभ प्राप्त करते है । 6 से 8 माह तक देखभाल के पश्चात परिपक्व लाख की कटाई कर बाजार में बेचकर लाभ प्राप्त करते है ।
लाभ प्राप्त करने के लिए लाख पालन सम्बंधित प्रबंधक प्राथमिक वनोपज सहकारी से संपर्क करना होगा । समिति परिक्षेत्र अधिकारी उप वनमण्डलाधिकारी / उप प्रबंधक संचालक जिला यूनियन एवं वनमण्डलाधिकारी ।
क्या लाभ प्राप्त होंगे - निशुल्क प्रशिक्षण एवं तकनिककी सहायता निशुल्क बीहन लाख/ कीटनाशक एवं आवश्यक उपकरण लाख का अधिक उत्पादन अंतिम रूप से अधिक मूल्य प्राप्त होगा । ग्राम स्तर एवं हाट बाजार स्तर के स्वंय सहायता समूह को क्रमशः 15000 /- एवं 50000/- की चक्रीय राशि उपलब्ध कराई जाएगी ।
संभावित लिकेजेज - कृषि , उद्यानिकी विभाग , जिला पंचायत , वन विभाग (लघु वनोपज संघ) के संयुक्त प्रयास से लाख खेती से क्षेत्र में विस्तार से किया जा सकता है ।
*जन जुड़ाव* अनमोल फाउंडेशन द्वारा संचालित एक ऐसा मंच है जो जमीनी स्तर किए जा रहे छोटे छोटे स्वेच्छिक प्रयासों की सफल कहानियों, शासकीय योजनाओं व जनहित से जुडी कानूनी जानकारियों को संग्रह कर प्रसारित करने हेतु तैयार किया गया है
Thursday, 1 November 2018
लाख पालन
कृषि विस्तार प्रशिक्षण एवं प्रचार कार्यक्रम
क्रियान्वयन एजेंसी - कृषि विभाग
कार्यक्षेत्र - सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
योजना का उद्देश्य - कृषि के विस्तार के लिए प्रशिक्षण भ्रमण सम्मेलन ।
हितग्राही की पात्रता - सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किए जाते है, परंतु लघु सीमांत अनुसूचित जाति / जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है ।
मिलने वाला लाभ - राज्य के अंदर और बाहर कृषक भ्रमण
इस योजना में कृषक सम्मेलन का प्रावधान है
आवेदन भेजने की प्रक्रिया - क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषकों का चयन कर ग्राम पंचायत की अनुसंसा के पश्चात वरिष्ठ क्रियाही विस्तार अधिकारी के माध्यम से उप संचालक कृषि को प्रेषित किया जाता है ।
कृषि यांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजना
क्रियान्वयन एजेंसी - कृषि विभाग
कार्यक्षेत्र- सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
योजना का उद्देश्य - कृषि के क्षेत्र में उन्नत कृषि यंत्रों के प्रयोग को बढ़ावा देना ।
हितग्राही की पात्रता - सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किए जाते है , परन्तु लघु सीमांत , अनु जाति / जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है ।
मिलने वाला लाभ - हस्तचालित कृषि यंत्र कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम 2000/- रुपए
बैल चलित कृषि यंत्र कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम 3000/- रुपए
सभी प्रकार के शक्ति चलित थ्रेसर कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम 1500/- रुपए
शक्ति चलित यंत्र कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम रुपए 10000/-
विशेष शक्ति चलित यंत्र कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम रुपए 30000/-
आवेदन की प्रक्रिया - क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषकों का चयन कर ग्राम पंचायत की अनुसंशा के पश्चात वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से उप संचालक कृषि कोंप्रेषित किया जाता है ।
आवेदन भेजने का पता - उप संचालक (कृषि) सम्बंधित जिला केंद्र द्वारा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड ।
अन्नपूर्णा योजना
क्रियान्वयन एजंसी - कृषि विभाग
कार्यक्षेत्र - सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
योजना का उद्देश्य - धान फसल के प्रामाणिक बीज के लिए कृषकों को आत्मनिर्भर करना
हितग्राही की पात्रता - सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किए जाते है परंतु लघु सीमांत अनु.जाति/जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है ।
मिलने वाला लाभ - बीज अदला बदली योजना , बीज वितरण संस्था द्वारा अदला - बदली में प्रदाय बीज पर 75 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम रुपए 1500/- की सीमा में लघु एंव सीमांत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कृषकों को रहेगी ।
आवेदन की प्रक्रिया- क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषकों का चयन कर ग्राम पंचायत की अनुसंसा के पश्चात वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से उप संचालक कृषि को प्रेषित किया जाता है ।
चयन की प्रक्रिया - जिला पंचायत के कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता है ।
आवेदन भेजने का पता - उप संचालक (कृषि) सम्बंधित जिला केंद्र द्वारा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकास खंड ।
खलिहान अग्नि दुर्घटना बीमा योजना
क्रियान्वयन एजेंसी - कृषि विभाग
कार्यक्षेत्र - छत्तीसगढ़ राज्य के तहसीलों के समस्त कृषक
योजना का उद्देश्य - खलिहानों में सिंचाई हेतु रखी गई फसलों / उपज के अग्नि दुर्घटना से हुई क्षति की पूर्ति करना ।
मिलने वाला लाभ- सीमांत कृषक (2.5 से 5 एकड़ तक) अधिकतम 2500/- रुपए या वास्तविक आंकलित क्षति जो भी कम हो
लघु कृषक (2.5 से 5 एकड़ तक) अधिकतम 5000/- रुपए या वास्तविक आंकलित क्षति जो भी कम हो ।
दीर्घ कृषक (2.5 से 5 एकड़ तक ) अधिकतम 10000/- रुपए या वास्तविक आंकलित क्षति जो भी कम हो ।
चयन की प्रक्रिया - क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषकों का चयन कर ग्राम पंचायत की अनुसंसा के पश्चात वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से जिला पंचायत के कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता है ।
लघु सिंचाई योजना
क्रियान्वयन एजेंसी - कृषि विभाग
कार्यक्षेत्र - सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
योजना का उद्देश्य - सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि करना
हितग्राही की पात्रता - सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किए जाते है, परन्तु लघु सीमांत, अनु. जाति/ जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है ।
मिलने वाले लाभ - नाबार्ड द्वारा अनुमोदित या जिले में प्रचलित दर पर खनन की लागत दरों में से जो भी कम हो उसका 50 प्रतिशत या 8000 रुपया जो भी कम हो अनुदान देय है।
चयन की प्रक्रिया - जिला पंचायत के कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता है ।
आवेदन की प्रक्रिया - क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषकों का चयन कर ग्राम पंचायत की अनुशंसा के पश्चात वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से जिला के कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता है ।
लघु सिंचाई योजना ( लघु/ सीमांत कृषकों हेतु लो-लिफ्ट पम्प योजना)
क्रियान्वयन एजेंसी - कृषि विभाग
कार्यक्षेत्र- सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
योजना का उद्देश्य- सिंचाई क्षेत्र में वृध्दि करना
हितग्राही की पात्रता - योजनांतर्गत अनुदान दिए जाने का प्रावधान वर्ष 2005 -06 से लागू है । योजनान्तर्गत75 प्रतिशत केंद्र प्रवर्तित मैक्रो मैनेजमेंट योजना में लिफ्ट पम्प पर 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है । राज्य के लघु / सीमांत वर्ग के सभी कृषकों को इस पम्प पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान राज्य शासन द्वारा दिया जा रहा है इस प्रकार कुल 75 प्रतिशत अनुदान लघु/सीमांत कृषकों को देय है ।
मिलने वाला लाभ - 40 हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता वाले तालाबों का निर्माण शत प्रतिशत शासकीय व्यय पर तालाब निर्मित किए जाते है ।
चयन की प्रक्रिया - जिला पंचायत के कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता है ।
आवेदन की प्रक्रिया - क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषकों का चयन कर ग्राम पंचायत की अनुसंसा के पश्चात वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से जिला पंचायत के कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता है ।
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