भोजन का अधिकार अभियान द्वारा आशीर्वाद भवन रायपुर में प्रांतीयसम्मेलन का आयोजन 28-29 मई2019 को किया जा रहा है जिसमे देश के 7 राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे है ।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉ द्रेज जी विराज पटनायक , दीपा सिन्हा व बलराम जी भी शामिल हो रहे है
कार्यक्रम में 28 मई को पीडीएस, सूचना का अधिकार एवं सामाजिक अंकेक्षण, खाद्य सुरक्षा व वन अधिकार, रोजी रोटी व मनरेगा, पोषण एवं स्वास्थ्य , मानव अधिकार एवं आधार व 29 मई को बच्चों के भोजन का अधिकार , मातृत्व हक, विस्थापन, खान-खनन एवं खेती किसानी, वंचित समुदाय (विशेष जंन जाति के खाद्य सुरक्षा एवं अन्य अधिकार ) पेंशन हमारा हक एवं विकलांगता जैसे गंभीर विषयों पर खुली चर्चा होगी ।
*जन जुड़ाव* अनमोल फाउंडेशन द्वारा संचालित एक ऐसा मंच है जो जमीनी स्तर किए जा रहे छोटे छोटे स्वेच्छिक प्रयासों की सफल कहानियों, शासकीय योजनाओं व जनहित से जुडी कानूनी जानकारियों को संग्रह कर प्रसारित करने हेतु तैयार किया गया है
Monday, 27 May 2019
ग्रामीण मुद्दों पर भोजन के अधिकार अभियान का प्रांतीय सम्मेलन
बिलाड़ी ग्राम की महिलाएं जैविक खेती को बढ़ावा दे रही
जनहित छत्तीसगढ़ विकास समिति बिलाड़ी जिला रायपुर द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाते हुए ग्राम में 14 एकड़ भूमि पर जैविक खाद, जैविक कीट नाशक महिलाओ द्वारा स्वंय से तैयार कर जैविक सब्जी खेती का कार्य कर रही है ।
उनके इस कार्य मे कदम दर कदम संस्था के संस्थापक रोहित पाटिल जी लगातार सहयोग करते है । महिलाओं को विहान परियोजना से जोड़कर मनरेगा के तहत इस कार्यक्रम को संचालित किया जा रहा है ।
यहां की महिलाएं काफी संगठित है उसी का प्रभाव है कि ग्राम की इस भूमि पर आज इनका अधिपत्य है । जिस तरह से भूमि का महिलाएं विकास कर खेती कर रही है जल्द ही यह ग्राम का सबसे उपयोगी भूमि होगा साथ ही महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनेगी ।
आत्मनिर्भरता की ओर महिलाएं
धरोहर संस्थान द्वारा कोरिया महिलाओं आत्मनिर्भर बनाने हेतु *एकता महिला संगठन* बना समूह के माध्यम से जिला प्रशासन के सहयोग से 22 लाख की लागत से पेवर ब्लॉक टाइल्स,सीमेंट पोल,ऐश ब्रिक्स निर्माण शुरु किया गया है जिसमे महिलाए अब धीरे धीरे काम सीखकर निर्माण कार्य शुरू कर दी जिससे अब महिलाओ की आत्मनिर्भरता दिखाई दे रही है ।
धरोहर संस्थान का यह प्रयास न सिर्फ महिलाओंको स्वावलंबी बनाएगा बल्कि उनके परिवार की आर्थिक सामाजिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान कर रहा है । महिला संगठन न सिर्फ उत्पादन बल्कि विक्रय का काम भी स्वंय महिलाएं ही करती हैं,इससे गांव में ही कई महिलाओं को रोज़गार मिल रहा है और ग्रामीण महिलाएं संगठन को द्वारा ग्राम विकास में भागीदारी कर रही हैं!
जैविक खेती व मोटे अनाज को बढ़ावा देते ग्रामीण
राजनांदगांव के मोहला ब्लाक के गोटाटोला ग्राम के ग्रामीणों को जन कल्याण सामाजिक संस्थान राजनांदगांव द्वारा *जैविक खेती व मोटा अनाज* सम्बन्धी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य रासायनिक का उपयोग बन्द कराना । साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए ।
जैसा कि सभी जानते है रासायनिक खादों के उपयोग से पैदा हुए अनाज खाने से लोगों का सेहत तो खराब हो ही रहा है साथ ही जमीन भी बंजर हो जा रही है ।
जबकि वही पर जैविक व मोटा अनाज ग्रामीणों का पारंपरिक खाद्य पदार्थ है जिसे धीरे धीरे समाप्ति की ओर ले जाया गया ।
जन कल्याण सामाजिक संस्था ऐसे मोटे अनाज के बीजों को संरक्षित करने के लिए संकल्पित है इसलिए गांव गांव इसका उत्पादन लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है ।
अब यह खाद्य पदार्थ कई बीमारियों में खाने के काम भी आता है और कम पानी मे भी उपज देता है । संस्थान का यह कार्य स्थानीय है ।
Monday, 20 May 2019
दहेज निवारण कानून
जिला खनिज फाउंडेशन DMF
16 दिसम्बर 2015 प्रधानमत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) की केंद्र सरकार द्वारा शुरुआत, जिसका उद्देश्य खनन प्रभावित लोगों व क्षेत्र के कल्याण के लिए DMF निधि के उपयोग पर दिशा- निर्देश देना है |
प्रदेश में 27 जिलों में DMF ट्रस्ट गठित हुआ है, परन्तु कोंडागांव, सुकुमा और नारायणपुर जिले में ट्रस्ट शुरू नही हुआ है,
जिले में खनन करने वाली कम्पनी को चाहे निजी क्षेत्र की हो या सार्वजनिक, सीधे DMF ट्रस्ट के खाते में टी रायल्टी का 10% या 30% जमा करना होगा
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प्रत्यक्ष
प्रभावित क्षेत्र
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अप्रत्यक्ष
प्रभावित क्षेत्र
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इसे क्षेत्र जहाँ उत्खनन, खुदाई, विस्फोटन, प्रसंस्करण एवं अपशिष्ट
निपटान आदि जैसे प्रत्य्स्कः खनन से अम्बन्धित सञ्चालन होता है |
यह किसी गाँव, झा खदान चलाती हो, उसकी पंचायत, ब्लाक या जिले तक हो
सकता है |
इसे गाँव जहां खनन प्रभावित परिवारों को बसाया गया हो
इसे गाँव जो अपने परम्परागत अधिकारों व उपभोग ( जैसे चारे, लघु
वनोपज आदि ) जी जरूरतों को पूरा करने के लिए खनन क्षेत्र पर निर्भर हो |
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जहां सम्बंधित संचालनो के कारण आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय
दुष्परिणाम पड़ते हो तथा जिसकी वजह से पानी, मिटटी और वायु गुणवत्ता में गिरावट
होती हो, ह्रास हो सकता है, भू- जल स्तर में कमी प्रदुषण भीड़ और खनिज परिवहन से
अधो संरचना पर दबाव शामिल है
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प्रत्यक्ष
प्रभावित लोग / समुदाय
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प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले प्रभावित और विस्थापित परिवार और
सम्बंधित ग्राम सभाओं द्वारा सम्यक रूप से चिन्हित परिवार | इसे व्यक्ति जिनके,
खनन की जा रही भूमि पर वैधानिक, व्यवसायिक पारम्परिक व उपभोग अधिकार हो |
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उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र
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अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र
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पेयजल आपूर्ति , स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता व् शिक्षा
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भौतिक अधोसंरचना
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पर्यावरण संरक्षण व प्रदुषण नियंत्रण उपाय
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सिचाई
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कृषि व सम्बद्ध कार्य
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ऊर्जा एवं जल विभाजक विकास
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महिला एवं बाल कल्याण व् वृद्धजन एवं निशक्तजनो का कल्याण
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राज्य सरकार द्वारा निर्देशित अन्य अधोसंरचना के कार्य
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कौशल विकास एवं रोजगार और जन कल्याण की कोई भी योजना
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