Sunday, 18 October 2020

विकासशील फाऊंडेशन के प्रयास से वनाधिकार पत्र मिला

विकासशील फाऊंडेशन बिलासपुर के अथक  प्रयास से  कोटा विकासखण्ड के ग्राम बांसाझाल 1 को 171 हेक्टेयर भूमि सामुदायिक वन संसाधन हक के लिए वनाधिकार पट्टा  मिला ।
ग्राम - बांसाझाल के आदिवासियों ने जल जंगल जमीन को पाने के लिए बरसो से आस लगाए रहे परन्तु गांव में लोगों को वनाधिकार की जानकारी का अभाव होने के कारण किसी भी प्रकार से अपनी हक को पाने के लिए प्रयास नही कर पा रहे थे, इसी बीच संस्था के कार्यकर्ता अमृका प्रसाद साहू ,ओंकारेश्वर शर्मा ने  गांव में संपर्क कर  सामूहिक बैठक कर ग्रामीणों को वनाधिकार अधिनियम के बारे से जानकारी दी गई साथ ही ग्राम सभा के माध्यम से वनाधिकार समिति का  गठन कराया गया ,जिसके उपरांत सभी ग्रामीणों के सहयोग से जल जंगल जमीन वन संसाधनों के हक के लिए जंगल भ्रमण कर नजरी नक्शा तैयार किया गया । दस्तावेज पूर्ण कर ग्राम सभा के माध्यम से विगत  दिनांक 31.10.2019  को उपखण्ड स्तरीय वी. ख.कोटा में  वनाधिकार समिति के द्वारा सामुदायिक दावा आवेदन जमा किया गया ।इस बीच वनाधिकार समिति व ग्रामीणों विगत 1 वर्षों से लगातार बैठक मीटिंग, विभागों का चक्कर कटाना पड़ा फिर भी वनाधिकार समिति एवं विकासशील फाउंडेशन ने हिम्मत नही हारी  ,बरसो का सपना  साकार हुआ दिनांक 02.10.2020 को सामुदायिक वन संसाधन के लिए 171 हेक्टेयर जमीन मिला ।
इस दौरान भारत ख़ुसरो,हरिद्वार ख़ुसरो,अर्जुन मरावी,छन्नूनेताम,जलेश्वर ,पुनिराम, दल्लू,बेदराम,रामभरोस,ईश्वरी खुसरो, विजयलक्ष्मी, गौतम,अमरौतीन ,धर्मिन व ग्रामीणजनों का सहयोग रहा।

पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र का ग्राम सम्पर्क अभियान

रायपुर- पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र लाभांडी रायपुर 17 अक्टूबर को ग्राम छतौना मंदिर हसौद में ग्राम संपर्क अभियान का आयोजन किया गया । जिसका उद्देश्य ग्राम सरोकार एवं आत्मनिर्भर भारत से जुड़ी बैंकिंग उत्पादों के प्रसार करना । 
अभियान की शुरू ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती सरोजनी बाई जांगड़े, पंजाब नेशनल बैंक मंदिर हसौद के प्रबंधक श्री रवि आनंद तथा पंजाब नेशनल बैंक कृषक प्रशिक्षण केंद्र लाभांडी के निदेशक श्री राजेश ध्रुव द्वारा किया गया । 
पीएनबी के अधिकारियों ने अभियान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान पूरे देश मे शुरू किया गया है । जिसका मुख्य उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना ।
जिसके लिए ग्रामीण सरोकार से जुड़ी बैंक की योजनाओं व सुविधाओं की जानकारी  ग्राम के हर जरूरतमंद तक पहुचाएं ताकि जरूरतमंद को लाभ मिल सके । कार्यक्रम में पीएमएसबीवाई, पीएमजेजेवाई तथा अटल पेंशन के बारे में जानकारी दी गई और पंजीयन भी किया गया ।   ग्राम छतौना के श्री बंजारी महिला समूह को 2 लाख, श्री गोपाल महिला समूह को 2 लाख, कलश महिला समूह को एक लाख तथा शीतल महिला समूह को एक लाख का ऋण स्वीकृत किया गया । 

Thursday, 15 October 2020

आत्मनिर्भरता की ओर महिलाओं ने बढ़ाया कदम

गायत्री स्वंय सहायता समूह मतवारी की महिलाएं समूह में जुड़कर अपनी आजीविका के लिए स्व रोजगार गतिविधि संचालित कर रही है । इन सबका नेतृत्व श्रीमती जागृति साहू जी कर रही है । अपने मेहनत व लगन से जागृति जी ने न सिर्फ अपनी क्षमताओं को बढ़ाया बल्कि समूह को  सशक्त कर आय वर्धक गतिविधियों से जोड़ा । जिसके कारण इन्हें बिहान परियोजना से तो जोड़ा ही गया साथ ही ग्राम के जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे मनरेगा , पेंशन आदि के राशि भुगतान का जिम्मा भी सखी बैंक कर माध्यम से सौंपा गया । 
जागृति जी ने समूह के सहयोग से मशरूम उत्पादन तथा मशरूम का स्पेम उत्पादन, साबुन, फिनायल, हैंडवॉश, मोमबत्ती, पेपर बैग आदि उत्पाद बना कर समूह से जुड़ी महिलाओं की आजीविका में सहयोग कर रही है ।
इसके अलावा *जागृति मशरूम व घरेलू उत्पाद प्रशिक्षण केंद्र* की स्थापना कर प्रशिक्षण देने का भी कार्य कर रही हों RSETI, देना बैंक व पीएनबी में मास्टर प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षण देने का कार्य भी करती है ।
आज अपने मेहनत व परिश्रम से अपने आपको रोजगार से तो जोड़ी ही साथ ही ग्राम की महिलाओं को भी रोजगार देकर उनकी आजीविका में मदद की ।

आस्था संगठन की महिलाएं आजीविका की सुरक्षा के साथ साथ पर्यावरण बचाने का भी संदेश दे रही है

रायपुर से कुछ 60 से 70 किलोमीटर दूर तिल्दा से लगभग 3-4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम बिलाड़ी यहां की महिलाओं ने कमाल कर दिखाया है । ये महिलाएं अपने मेहनत और जुनून से 14 एकड़ जमीन को न सिर्फ सुरक्षित रखी है बल्कि उसमे पौधरोपण व जैविक खेती कर पूरे क्षेत्र को हरा भरा बना दी है । यही से इन महिलाओं का आजीविका की व्यवस्था भी हो जाती है । 
आस्था महिला ग्राम संगठन की बहने पहले बिलाड़ी ग्राम में सड़क से लगे हुए 14 एकड़ जमीन के लिए संघर्ष की काफी लड़ाइयां लड़ने के बाद जमीन इनके अधिकार में आई अभी भी कुछ लोग दावा कर विवाद निर्मित करते रहते है लेकिन महिलाओं ने कभी हार नही माना । संघर्ष इनके साथ रच बस गया । ये सभी महिलाएं एकता परिषद से जुड़ी रही है संघर्ष वही से सीखा है । अब महिलाओं ने आस्था महिला ग्राम संगठन बिलाड़ी का गठन कर उससे जुड़ गई । समूह में जुड़ कर इन्होंने 14 एकड़ भूमि पर पहले भूमि सुधार का कार्य किया जिसमें पंचायत ने मनरेगा के तहत मदद की । इनके संघर्ष और प्रयासों को देख पंचायत भी सहयोग में आगे आ गया। धीरे धीरे इन महिलाओं को शासन द्वारा संचालित बिहान परियोजना से जोड़ा गया । जिसमें इन्हें आजीविका से सम्बंधित क्षमता विकास का प्रशिक्षण दिया गया। अब ये महिलाएं जैविक खेती की अनुभवी महिला कृषक है । 
ये खरपतवार ,गोबर व कचरे से कम्पोष्ट व जैविक खाद का निर्माण करती है जिसका प्रयोग ये सब्जी खेती व नर्सरी के विकास में उपयोग करती है गोबर आदि से जीवामृत बना कर पौधों में लगने वाले बीमारियों को समाप्त करती है । 
मुनगा के पत्तियों से चूर्ण बना दवाई के रूप में उपयोग करने हेतु बिक्री भी करती है जैविक फर्श क्लीनर, गोबर के दीपक आदि का भी निर्माण करती है । 
जो महिलाएं कल तक किसी के समक्ष खड़े होने में हिचकिचाहट करती थी आज सबके समक्ष अपनी बातों को अच्छे से बता पाती है । 
इस महिलाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका समाज सेवी श्री रोहित पाटिल जी निभाते है जो अपने समय मे से समय निकाल कर इन्हें मार्गदर्शन व सहयोग देते रहते है । 
आस्था महिला ग्राम संगठन में अध्यक्ष श्रीमती सविता पाटिल, मीरा कन्नौजे सचिव व खेड़िया बाई ,दुलौरिन बाई , गायत्री निषाद, कमला यदु, अंजनी निषाद, भानकुंवर यदु, लीला यदु, गायत्री यदु, हेमलता यदु सदस्य के रूप में शामिल है । 

ग्रीन आर्मी द्वारा गजराज बांध बचाने की मुहिम

ग्रीन आर्मी चंगोराभाटा रायपुर द्वारा संतोषी नगर पुराना धमतरी रोड स्थित गजराज बांध को बचाने हेतु जन जागरूकता मुहिम चलाया जा रहा है 
गजराज बांध का फैलाव 230 एकड़ में है जिसमे से शासन 100 एकड़ में मनोरंजन पार्क का निर्माण करना चाहती है जिसके लिए शासन स्तर पर कार्यवाही चल रही है । लगभग 60 एकड़ भूमि को लोगों ने पाट दिया है । इसी तरह अगर तालाबो को पाट कर उसके भूमि का उपयोग करने लगेंगे तो एक दिन तालाब समाप्त हो जाएगा । 
जैसा कि अभी तक देखा गया है 300 से ज्यादा तालाब थे जिसमें से 129 तालाब ही बचे हुए है । किसी भी शहर या गांव के जल स्तर को बनाए रखने में इन तालाबों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है । तालाब के किनारे पेड़ पौधे पर्यावरण को शुद्ध रखने में अपनी भूमिका निभाते है । 
पुराने जितने भी तालाब मिलेंगे सभी मे पानी वर्ष भर रहता है जबकि नए तालाबो में कभी पानी टिकता ही नही । शासन के द्वारा वैसे ही शहरों को कांक्रीट में तब्दील कर भूजल को बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया गया है । ऊपर से अगर पुराने जल सोत्रों को समाप्त कर दिया गया तो पानी के लाले पड़ जाएंगे । साथ ही जलवायु पर भी व्यापक असर होगा । 
तालाबों का इतिहास अति प्राचीन है।  प्राचीन काल में जल संचयन करने का प्रमुख साधन तालाब और कुंवा ही रहा है ।  लोगों ने तालाब में ही जल का संग्रहण करना प्रारम्भ किया और इस जल को विभिन्न प्रकार के कार्यों में उपयोग करते रहे है । पूर्व में  तालाब निर्माण का कार्य जमींदार, मालगुजार लोग स्वयं अपने निजी भूमि में तालाब का निर्माण करते थे, जिनका उपयोग लोग सार्वजनिक रूप से करते थे। साथ ही लोग इनका संरक्षण भी स्वयं करते थे।
आज भी देखें तो तालाब सिचाई के स्रोत के रूप में बड़ी भूमिका में है साथ ही पर्यावरण व जल संरक्षण को बचाने में भूमिका निभा रहा है । पुराने तलाबोंनके निर्माण व तकनीक नए तालाबों से अलग होती है इसीलिए पुराने तालाबों में वर्ष भर पानी रहा है जो मानव जीवन के लिए बहुमूल्य है । 
ग्रीम आर्मी द्वारा गजराज बांध को संरक्षित रखने का प्रयास सराहनीय है । ग्रीन आर्मी के चंगोरा भाटा जॉन के अध्यक्ष डाक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर जी का योगदान व प्रयास सराहनीय है ।

Wednesday, 14 October 2020

"#हमऔरहमारेकाम"अभियान शुरू

वैश्विक स्तर पर 12 अक्टूबर से जबाबदेही सप्ताह मनाया जा रहा है जिसमे बहुत सारी स्वैच्छिक शामिल हो रही है और अपने अपने तरह से यह वैश्विक जबाबदेही सप्ताह का आयोजन कर रही है । 
आज हर तरफ जबाबदेही की बात हो रही है पारदर्शिता की बात हो रही है ऐसे में हम क्यों पीछे रहे हर भी कुछ करना चाहिए । इसी सोच के साथ *जनजुड़ाव* द्वारा *#हमऔरहमारेकाम * के नाम से एक अभियान शुरु किए है । जिसमे हम अच्छे व सफल प्रयासों को संकलित कर जन जुड़ाव के सभी मंचो पर शामिल करने का छोटा सा प्रयास कर रहे है । हम कम से कम 10 ऐसे स्वैच्छिक प्रयासों को जरूर संकलित कर मंच पर लाएंगे और अपनी जबाबदेही सुनिश्चित करेंगे ।

अनमोल फाउंडेशन, जनजुड़ाव व 10 संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण सप्ताह मनाया गया

अनमोल फाउंडेशन व जनजुड़ाव के संयुक्त प्रयास से 20 सितंबर से 27 सितंबर तक पर्यावरण सप्ताह का आयोजन किया गया जिसमें वृक्षारोपण, निबंध प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, रंगोली, चित्रकला, बेविनार , बेकार पड़े समान से उपयोगी समान बनाने का प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें सरगुजा, कवर्धा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग से 10 सहयोगी संस्थाओं व जन संगठनों के सहयोग से 500 छात्र छात्राओं में अभियान में सक्रिय भागीदारी की गई।  अभियान में भाग लेने वाले विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया ।
इस तरह के आयोजन से 10000 से ज्यादा लोगों तक पर्यावरण बचाने का संदेश में कामयाब रहे । 

Sharing Experiences on AgriStack and Digital Food Assistance

A two-day dissemination workshop on “Digitalizing Food Assistance: Effective on Food Security – A Research Study” was organized at Jan Swas...