Wednesday, 8 September 2021

उदयपुर के जंगल में दिखे हाथियों का एक दल - आखिर गांव व शहरों की ओर क्यो रुख कर रहे जंगली जानवर

सरगुजा उदयपुर- हाथी शब्द सुनकर ही विशालकाय रूप सामने आ जाता है । सोचिए जब ये आपके सामने हो तो क्या हालात होंगे ।
कल हाथियों का एक झुंड सरगुजा जिले के उदयपुर के जंगल मे देखा गया । खबर यह भी है कि हाथियों के झुंड ने बाइक सवार एक परिवार को कुचल दिया जिसमें एक बच्चा भी है । मृतक परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदना है । 
हाथियों के झुंड के देखे जाने के तुरंत बाद से ही उदयपुर के युवा जागरूक साथी लोग अपने व्हाट्सएप व फोन के माध्यम से अपने अपने लोगों को सतर्क रहने के लिए सूचना देने लगे । बावजूद इसके एक परिवार के साथ दुर्घटना घटित हो ही गया । 
एक लंबे समय से अविभाजित सरगुजा जिले में हाथियों का एक दल लगातार उड़ीसा से रायगढ़ व जशपुर के रास्ते होते हुए अविभाजित सरगुजा के कुसमी सामरी के जंगल मे पहुंचा। गांवों में भी प्रवेश किया नुकसान भी किया । पहले पटाखे फोड़ कर हाथी को डराते थे वे डर कर भागते भी थे लेकिन यह डर ज्यादा दिन नही चला। हाथियों ने पटाखे से डरना छोड़ दिया । फिर बिजली के तार लगाए गए । लेकिन शुरुआत में कुछ दिन यह भी सफल रहा लेकिन बाद में यह भी तरीका फेल हो गया । 
और हाथी धीरे-धीरे सरगुजा के जिला मुख्यालय अम्बिकापुर में शहर के अंदर भी दस्तक दे दी । 
उसी समय अम्बिकापुर से अमलेंदु मिश्रा व उनके बड़े भाई हाथियों पर काफी काम किए । इसी सरगुजा में हाथियों के ऊपर फ़िल्म बना माइक पांडेय को आस्कर अवार्ड भी मिला । 
ये सबकुछ हुआ पर समस्या जस की तस बनी रही । वन विभाग में हाथियों के दल को रोकने के लिए और प्रभावित परिवारों के सहायता के लिए योजनाएं खूब बनी काम क्या हुआ क्या नही यह तो वह विभाग जाने । पर हाथियों के संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई और उनके आवाजाही में भी वृद्धि हुई । 
जहां वे सरगुजा के एक क्षेत्र तक सीमित थे वे धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ राज्य के कई जिलों में पहुंच गए । उत्तर छत्तीसगढ़ से वे दक्षिण छत्तीसगढ़ तक अपना साम्राज्य का विस्तार कर लिया । आज वे सरगुजा के मैनपाट में लखनपुर और उदयपुर में अलग -अलग दल उपलब्ध है वही दक्षिण बस्तर के कांकेर जिले के चारामा व भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में कई दिनों से डेरा डाले हुए । 
वन अमला अपना काम कर रहा है क्या कर रहा है इस पर आगे दूसरे लेख में लिखेंगे । पर यहां यह जानना जरूरी है कि ऐसा क्यों हो रहा है कि जंगली जानवर गांव व शहर की ओर अपना रुख अपना रहे है । जो जानवर कभी आदमी से डरते थे आज वे बिना डरे घूम रहे हैं। हम जो देखते उसकी नजर में वनों व जंगलों में मनुष्यों का हस्तक्षेप आवश्यकता से ज्यादा बढ़ गया है । गीता में कहा है कि *शेर वनों की सुरक्षा करता और वन शेर की सुरक्षा करता है* । 
1- वनों की अंधाधुंध कटाई - वनों से भारतीय पेड़ों को काट कर समाप्त कर दिया जा रहा है जो पर्यावरण के अनुकूल हैं जिन पर पक्षी निवास करते है, जिनसे पशु पक्षियों को खाने की व्यवस्था होती है । 
2- औद्योगिकरण का वन क्षेत्र की ओर विस्तार -वन क्षेत्रों में खनिज संपदा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । सरकार व बड़े उद्योगपतियों की नजर इधर है । सरकार को इससे एक बड़ी आय होती जिसके लिए इसका दोहन करते है । और इन्ही खनिजों से बनने वाले सामानों के लिए उद्योग लगाए जाते है जिसके लिए भी भूमि सरकार वन क्षेत्रों से ज्यादा उपलब्ध कराती है । जिससे वनों का नुकसान होता है । 
3- माइंस के कारण - छत्तीसगढ़ माइंस व मिनरल्स से भरा पूरा राज्य है । यहां कोयला,लोहा, बाक्साइड,अभ्रक, हीरा आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है इन खनिज संपदा का दोहन करने के जंगल उजाड़े जा रहे है और माइंस का जाल विछाया जा रहा है । खदानों से जंगल तो खत्म होते है उनके खुदाई में ब्लास्ट करने से भी जानवरो को डर लगता है जिससे वे गांवों व शहर की तरफ निकल जाते है । 
4- माइंस व उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण - माइंस व उद्योग की स्थापना तो कर दी जाती है लेकिन इनसे निकलने वाले धुंवे, कचरे व गंदगी प्रदूषण फैलाने का कार्य बड़े स्तर पर कर रहे है । जिससे जलवायु में परिवर्तन तेजी से हो रहा है । बढ़ते प्रदूषण का असर मनुष्य के साथ- साथ पशु पक्षियों के जीवन पर भी पड़ता है । इसके कारण भी पशु पक्षी पलायन करने को बाध्य हो जाते है । 
5- नदियों पर उद्योगों का कब्जा - नदियों के पानी का दोहन उद्योगों द्वारा किया जा रहा है जिससे जानवरों को पीने के लिए पानी आसानी से उपलब्ध नही हो पा रहा । पानी के तलाश में जानवर, पशु पक्षी गांव व शहर का रुख कर रहे है । 
6- वनोपज का दोहन - वनों से पशु पक्षियों के खाने वाले उपज को दोहन कर लिया जा रहा है जिससे जानवरों व पशु पक्षियों के लिए खाने की व्यवस्था वनों में नही हो पा रही इस कारण भी वे गांव व शहर का रुख कर रहे है । 
7- जलवायु परिवर्तन- जलवायु परिवर्तन के बड़ी वजह है। वन क्षेत्रों में पहले ठंड होती थी शीतलता होती थी जो अब समाप्त होते जा रही है । मौसम में परिवर्तन भी हो रहा है जिससे व्याकुल होकर जानवर, पशु पक्षी गांव व शहर कही भी जा रहे है । 
8- कांक्रीट का जाल - विकास के नाम पर जंगलों को काटकर चौड़ी -चौड़ी सड़कें बनाई जा रही है । गांवों में पक्के भवनों का जाल बिछ रहा है जिससे तापमान में भारी बदलाव आया है । अब जंगल क्षेत्र में भी दिन में भीषण गर्मी देखने व महसूस करने को मिल रही है । आदमी तो कुकर व एसी लगा के मस्त है । पर ये न बोलने वाले जानवर व पशु पक्षी कहां जाएं ।
उपाय 
1- जानवरों के व्यवहार पर अध्ययन होना चाहिए
2- जानवरों के खान- पान, रहन सहन का अध्ययन होना चाहिए और वे जो चीजे खाते वो उन्हें प्राकृतिक रूप से जंगलों में मिल सके इसके लिए व्यवस्था बनानी चाहिए 
3- भारतीय पौधों का रोपण किया जाना चाहिए जो पर्यावरण के साथ -साथ पशु पक्षियों के लिए भी अनुकूल हो ।
4- वनों के अंदर पीने के पानी की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए 
6- औद्योगिकरण व माइंस को कम किया जाना चाहिए 
7- प्रदूषण न हो इसके उपाय किए जाने चाहिए 
8- जानवरों से मानव हानि न हो इसके लिए सूचना प्रणांली विकसित किया जाना चाहिए । 
9- कांक्रीट का जाल बिछाना बंद हो पर्यावरण के अनुकूल विकास के रास्ते तलाशने चाहिए । 
10- पारम्परिक तौर तरीकों को उपयोग में लाना चाहिए उनको बढ़ावा भी दिया जाना चाहिए । 
11- वनों का विकास किया जाना चाहिए जो प्राकृतिक तरीके से ज्यादा हो । खरपतवार का उपयोग जैविक खाद के रूप में हो। ऐसे पौधे लगाए जाएं जिनके फलों को पशु पक्षी खा सके । पशु पक्षी कीड़े मकोड़े परागण अच्छी तरह करते है । अतएव ऐसे पौधे ज्यादा लजे जिनका परागण पशु पक्षियों व कीट पतंगों द्वारा होता है ताकि वृक्षों के लगाने में इनकी भी प्राकृतिक भूमिका हो । वनों के विकास में वाहक बने । 
संजय शर्मा 
सोशल एक्टिविस्ट 

Wednesday, 18 August 2021

आस्था महिला बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति ने आगामी योजना बनाई

आस्था महिला बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति की महिलाओं ने आजिविका प्रबंधन हेतु बैठक का आयोजन बिलाड़ी स्थित घुघुवा टैंक में किया । इसका मुख्य उद्देश्य आगामी वर्ष की कार्ययोजना तैयार करना तथा उसके क्रियान्वयन पर चर्चा करना रहा । 
बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमे  5 एकड़ जमीन में नर्सरी लगाना, महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना,नर्सरी की देखभाल व संरक्षण संवर्धन, कांटे का घेराव करने की व्यवस्था , नर्सरी के पौधों का विक्रय हेतु व्यवस्था बनाना, जैविक खेती पर विस्तार योजना ।  
इन समस्त कार्यों से समिति की महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा और वे स्वावलम्बन की ओर आगे बढ़ेगी ।
इस अवसर पर बिहान योजना,,से पी,डी,पी, एम,विक्रम लोधी,बी,पी, एम, आनंद भारद्वाज, रितेश तिवारी, महिला मण्डल बिलाडी, आस्था महिला बहुदेशीय मर्यादित सहकारी समिति से सरोज पवार, ममता कुर्रे,मंजू पोर्ते, कमला यदू,वर्षा यदू व सामाजिक कार्यकर्ता रोहित भाई पाटिल उपस्थित रहे।

सहभागिता से बनाएंगे *ग्राम कुटीर*

ग्राम अधिकार मंच वर्ष 2005 से क्षेत्र में सक्रियता के साथ कार्य कर रही है । मंच अपने संगठन में उत्साह का संचार करने तथा शसक्त बनाने हेतु क्षेत्र में लगातार अभियान चला कर बैठकें कर रही है तथा सदस्यता बढ़ा रही है । 
मंच को मजबूत बनाने हेतु अलग अलग विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम व जागरूकता के कार्य प्रभावी तरीके से लगातार किए जा रहे है । इसी क्रम में ग्राम अधिकार मंच नवापारा कला के सुमेला बहरा में मंच का प्रशिक्षण व संसाधन केंद्र की स्थापना करने की तैयारी जोर शोर से कर रही है । जिसके सम्बन्ध में  नवापारा कला में मंच के सदस्यों व पदाधिकारियों के साथ मंच के संयोजक राकेश राय ने बैठक ली  जिसमें संगठन विस्तार, सहायता कार्य, ग़ाम कुटीर निर्माण,जोनल कमेटी चयन, वार्षिक कार्य योजना ,आम सभा के गठन पर चर्चा किया गया। साथ ही कार्य व ग्राम कुटीर निर्माण स्थान का अवलोकन किया गया।

स्वावलम्बन की मिशाल पेश कर रही करहिकछार कि महिलाएं

बिलासपुर /कोटा- *संगम महिला बहुउद्देशीय सहकारी समिति करहिकछार* समिति की महिलाएं लघु उद्योग की स्थापना कर उसे सक्रियता के साथ सफलतापूर्वक संचालित कर आत्मनिर्भरता व स्वावलंबन की मिशाल पेश कर रही है । समिति की महिलाओं ने तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी कौशल क्षमता  में वृद्धि कर स्थानीय स्तर पर वॉशिंग पॉवडर फिनाइल, हैंडवॉश, बर्तनबार, डिशवाशर, टॉयलेट क्लीनर, अचार सफलता पूर्वक गुणवत्ता युक्त समान बना अच्छे सुरक्षित पैकेजिंग के साथ बाजार में कम दाम पर लोगों को उपलब्ध करा रही है । 
समिति की महिलाएं कृषि के क्षेत्र में भी अपने आपको सशक्त बना रही है ताकि महिला किसान आगे आए और अपने आपको स्थापित करें ।  कृषि के क्षेत्र में परंपरागत बीज संरक्षण एवं संवर्धन कोदो कुटकी, रागी आदि मोटे अनाजों पर समिति की महिलाएं  सक्रियता के साथ सफलतापूर्वक कार्य कर रही है । इनका यह प्रयास अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बन रहा है । 

समिति की महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने व उनका उत्साह वर्धन हेतु  प्रशिक्षण देकर तैयार करने में  सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बामने, प्रकाशमणि  क्रांति मरावी व बेन रत्नाकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

संगम महिला बहुउद्देशीय सहकारी समिति करहिकछार* के द्वारा संचालय आर्थिक सामाजिक अगिविधियों का निरीक्षण करने के लिए *NCDC (नेशनल कोऑपरेटिव डेव्हलपमेंट कारपोरेशन)* रीज़नल डायरेक्टर श्री कैलाश कुमार कौशिक , करहिकछार पहुंचे तथा महिलाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों की  सराहना की है और विभगीय मदद करने का भरोसा जताया है।

Thursday, 12 August 2021

आजीविका हेतु महिलाओं ने की नर्सरी तैयार

तिल्दा रायपुर -    मेहनतकश लोग जीवन जीने के रास्ते बना ही लेते है, रायपुर जिले अंतर्गत तिल्दा नेवरा विकास खंड के ग्राम बिलाड़ी में अपनी परिवार के भरण पोषण,परिवार व ग्राम को शसक्त बनाने की दिशा में ग्राम की महिलाओं ने मिलकर घुघुवा टैंक बिलाड़ी में 14 एकड़ भूमि में आजीविका बाड़ी का निर्माण किया है। जिसमे नित नए -नए प्रयोग कर रही है । बाड़ी में फलदार वृक्षों के साथ -साथ मूंगा, के पौधे भी रोपित किए गए जिनके फल को सब्जी बाजार में बेचा जाता है तथा उसके पत्तों से पाउडर बना कर दवाई के लिए बेचा जाता है । 
अपने आजीविका बाड़ी के विकास व महिलाओं के आर्थिक स्थिति को बेहतर व स्वावलंबी बनाने हेतु नर्सरी में पौधे भी तैयार किए जाते है । चर्चा में समाज सेवी रोहित पाटिल जी ने बताया कि इस समय महिलाएं मिलकर नर्सरी हेतु मिट्टी तैयार कर रही है जिसमे 
चींटी पाउडर , भिभोरा की काली मिट्टी, रेत, मुर्गी खाद, भेड़ खाद,गौ कम्पोस्ट खाद आदि का मिश्रण करके मिट्टी तैयार किया जाता है । जिसे कारपोली बैग में भरकर काजू,बदाम, श्री आंवला,खिरी, जंगली बदाम,कटहल,नींबू,मुनगा, पपीता के बीजों का रोपण कार्य किया जायेगा ।

Saturday, 7 August 2021

राज्य योजना आयोग छत्तीसगढ़ द्वारा गठित वर्किंग कमेटी की बैठक सम्पन्न

राज्य योजना आयोग छत्तीसगढ़ द्वारा *आदिवासी विकास ,वन एवं वन्यजीव प्रबंधन, लघु वनोपज प्रबंधन क्षेत्रों का विकास* विषय पर गठित टास्क फोर्स अंतर्गत कार्य समूह की प्रथम बैठक का आयोजन अध्यक्ष व मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार श्री राजेश तिवारी जी की अध्यक्षता में किया गया । उक्त बैठक में शासन के सम्बंधित विभागों के प्रतिनिधि, स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि जो वर्किंग कमेटी के सदस्य है शामिल हुए । जिसमे अनमोल फाउंडेशन की तरफ से श्री संजय शर्मा जी शामिल रहे ।

Sunday, 1 August 2021

3 री बटालियन अमलेश्वर में वृक्षारोपण किया गया

ग्रीन आर्मी चंगोराभाठा द्वारा 3 री बटालियन के कैम्पस अमलेश्वर में वृक्षारोपण कार्य का आयोजन किया गया । उक्त अवसर पर बटालियन के एडिशनल  श्रीमती गायत्री सिंह,  डीएसपी श्री संजय दीवान, ग्रीन आर्मी चंगोराभाठा  अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम चन्द्राकर,  अनमोल फाउंडेशन के श्री संजय शर्मा, गुरुकुल महाविद्यालय ई सहायक प्राध्यापक  एन एस एस प्रभारी रात्रि लहरी छात्र व ग्रीन आर्मी बटालियन की टीम शामिल हुए

यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...