Thursday, 1 November 2018

लाख पालन

योजना का नाम - लाख पालन (उत्पादन)
हितग्राही की पात्रता - ऐसे समस्त ग्रामीण जिनके पास कुसुम, बेर, एवं पलास के वृक्ष है ।
ऐसे ग्रामीण जो जन सहभागिता से शासकीय भूमि में।कुसुम , बेर, पलाश वृक्षो का संरक्षण करने वाले स्वंय सहायता समूह के सदस्य हों ।
योजना का उद्देश्य - लाख उत्पादन में वृद्धि करना एवं कृषकों को उसका उचित मूल्य दिलाना। लाख के पालक वृक्षो का संरक्षण करना एवं उनकी संख्या में वृद्धि करना । ग्रामीणों को आय के अतिरिक्त स्रोत का विकास करना ।ब्रूड लाख फार्म की स्थापना कर बीहन लाख की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
योजना का लाभ - परम्परागत पद्धति से की जा रही लाख की खेती को वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षित करना जिससे लाख के उत्पादन में वृद्धि होगी एवं ग्रामीणों की आय में वृद्धि तथा वृक्षो का संरक्षण होगा । ग्राम स्तर, हाट बाजार एवं प्रसंस्करण स्तर पर स्वंय सहायता समूहों का गठन किया जावेगा एवं चक्रीय राशि एवं ऋण उपलब्ध कराया जाएगा ।
लाभ प्राप्त करने के चरण - प्रथम चरण में हितग्राहियों को लाख पालन के वैज्ञानिक विधि का प्रशिक्षण दिया जाता है पालक वृक्षो की कटाई - छटाई करते है । बीहन लाख प्रदाय किया जाता है जिसे पालक वृक्षो पर बांधते है तथा उनकी लाख उतार लेते है तथा विक्रय कर लाभ प्राप्त करते है । 6 से 8 माह तक देखभाल के पश्चात परिपक्व लाख की कटाई कर बाजार में बेचकर लाभ प्राप्त करते है ।
लाभ प्राप्त करने के लिए लाख पालन सम्बंधित प्रबंधक प्राथमिक वनोपज सहकारी से संपर्क करना होगा । समिति परिक्षेत्र अधिकारी उप वनमण्डलाधिकारी / उप प्रबंधक संचालक जिला यूनियन एवं वनमण्डलाधिकारी ।
क्या लाभ प्राप्त होंगे - निशुल्क प्रशिक्षण एवं तकनिककी सहायता निशुल्क बीहन लाख/ कीटनाशक एवं आवश्यक उपकरण लाख का अधिक उत्पादन अंतिम रूप से अधिक मूल्य प्राप्त होगा । ग्राम स्तर एवं हाट बाजार स्तर के स्वंय सहायता समूह को क्रमशः 15000 /- एवं 50000/- की चक्रीय राशि उपलब्ध कराई जाएगी ।
संभावित लिकेजेज - कृषि , उद्यानिकी विभाग , जिला पंचायत , वन विभाग (लघु वनोपज संघ) के संयुक्त प्रयास से लाख खेती से क्षेत्र में विस्तार से किया जा सकता है ।

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