Thursday, 8 September 2022

सामुदायिक सहभागिता से ही पर्यावरण संरक्षण सम्भव

अनमोल फाउंडेशन द्वारा  रायपुर स्थित होटल मयूरा में कट्स इंटरनेशनल जयपुर व स्वीडिश सोसाइटी फार नेचर कंजर्वेशन के सहयोग से *ग्रीन एक्शन वीक अभियान  इंडिया 2022* के अंतर्गत सामुदायिक साझाकरण को बढ़ावा देने हेतु एक दिवसीय स्टेकहोल्डर्स कार्यशाला का आयोजन किया गया । उक्त कार्यशाला में 54  शासकीय अधिकारी, एन जी ओ व समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । 
कार्यक्रम बतौर मुख्य अतिथि श्री हरबंश सिंह मिरी  छ ग प्रदेश कंवर समाज के सामाजिक अध्यक्ष एवं (संयुक्त ककेक्टर) कंट्रोलर राजभवन व अतिथि एवं तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में क्रेडा छत्तीसगढ़ के मुख्य अभियंता श्री संजीव जैन जी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से एग्रो- मेट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर जी के दास, छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर श्री अजय मालू, कट्स इंटरनेशनल के निदेशक श्री जार्ज चेरियन व एसोसिएट निदेशक दीपक सक्सेना जी, प्रेरक संस्थान के निदेशक रामगुलाम सिन्हा जी व प्रदान से कुंतल मुखर्जी जी रहे । 
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से अनमोल फाउंडेशन के निदेशक संजय शर्मा ने अनमोल फाउंडेशन के पर्यवर्णीय गतिविधियों व ग्रीन एक्शन वीक अभियान के छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रयासों व अनुभवों को
 साझा करते हुए बताया कि विगत 3 वर्षों से यह अभी फाउंडेशन रायपुर शहर में संचालित कर रहा है जिसमे लोगों को अधिक से अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने, प्लास्टिक का उपयोग न करने, कपड़े का बैग का उपयोग करने, घरेलू कचरे का निदान घर पर ही खाद बना करने व टेरिस गार्डन को बढ़ावा देने । साइकल का प्रयोग का वाहन प्रदूषण को रोकने, सौर्य ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कर विद्युत खपत को कम करने आदि के बारे में जानकारी देते हुए अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया गया । 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जार्ज चेरियन जी ने कहा कि ग्रीन एक्शन वीक अभियान को भारत देश मे 2018 से चलाया जा रहा इस वर्ष इसमे 14 राज्यों में स्वैच्छिक संस्थाओं के साथ मिलकर इस अभियान को संचालित किया जा रहा है जिसमे राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, त्रिपुरा, आसाम, सिक्किम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना राज्य शामिल है। 
उन्होंने कहा कि कोविड के समय प्लास्टिक से बने सामानों  का बहुत ज्यादा प्रयोग हुआ जिसमे मास्ट , दस्ताने, फेसशील्ड, सेनेटाइजर बॉटल व इलेक्ट्रॉनिक सामानों में लैपटॉप व मोबाइल गैजेट । केरल राज्य में 400 प्रतिशत राजस्थान में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई । इससे ई कचरा बहुत ज्यादा उतपन्न होगा । जो कि चिंता का विषय है । 
हरबंश सिंह मिरी ने सभा को छत्तीसगढ़ की संस्कृति का सम्मान बात की और अपना उद्बोधन छत्तीसगढ़ी में देकर लोगों से अपील की कि हम अपने मातृ भाषा का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें । उन्होंने हमारी ग्रामीण संस्कृति, जैविक खेती व उनके ग्राम के लोगों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सभी के साथ साझा करते हुए जानकारी दी कि उनके ग्राम में पौधरोपण को लेकर जिस तरह से अभियान चलाए जा रहे उससे जल्द ही उनका ग्राम देश का पहला ग्राम बनेगा पर्यावरण सुरक्षा के प्रयासों के मामलों में । अजय मालू जी ने बताया कि सरकार कानून बहुत सारे बनाए है काम भी हो रहा है लेकिन बिना जन भागीदारी के निराकरण कर पाना सम्भव नही होगा उन्होंने प्लास्टिक को रोकने के लिए बनाए गए कानून को सभी के साथ साझा किया साथ परंपराओं के साथ चलने की बात कही। कचरा पारम्परिक तरीके व आधुनिक तरीको पर भी बात कही । संजीव जैन जी सौर्य ऊर्जा से होने वाले फायदे के बॉर्डर में जिक्र करते हुए शासन की योजनाओं के सम्बंध में बताया सौर ऊर्जा लगा कर किस तरह विजली खपत को कम किया जा सकता साथ अपने खर्चे को भी कम किया जा सकता है । भोजन बनाने से लेकर सिचाई सुविधाओं तक सौर्य ऊर्जा उपयोग हो रहा है सिचाई छत्तीसगढ़ बहुत ही आगे है । जी के दास जी ने जैविक खेती को बढ़ावा देने भूमि की उर्वरता को सुरक्षित रखने हेतु जैविक खेती  को प्रोत्साहित करने की बात कही साथ ही उन्होंने आवश्यक सहयोग देने की बात भी कही । रामगुलाम सिन्हा जी मे जैविक खेती के माध्यम से बैगा समुदायों के उत्थान पर चर्चा करते हुए जानकारी दी । कुंतल मुखर्जी ने कृषि के माध्यम से पर्यावरण की सुरक्षा के बारे मे बताया और अपने संस्थान के अनुभवों को साझा किया । दीपक सक्सेना जी ने मॉडरेटर के रूप में सभी की बातों को संकलित करते हुए कहा कि सभी लोग अगर मिलकर प्रयास करेंगे तो निःसन्देह बेहतर लाभ मिलेगा । अंत संजय शर्मा ने सभी आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया । 

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Testimonial – Sanjay Sharma

Sanjay Sharma is a seasoned social development practitioner with over 30 years of dedicated experience working in the remote tribal regions ...