Wednesday, 30 September 2026

खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता

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खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता
📍 जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS), गनियारी, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
📅 29–30 सितंबर 2026

जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS), गनियारी, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में 29–30 सितंबर 2026 को “Dissemination Workshop on Digitalizing Food Assistance: Effective on Food Security – A Research Study” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन Institute for Human Development (IHD), SOAS University of London तथा Economic and Social Research Council (ESRC) के सहयोग से किया गया।
इस कार्यशाला में अनमोल फाउंडेशन के सीईओ श्री संजय शर्मा ने सहभागिता की तथा एक पैनलिस्ट के रूप में एग्रीस्टैक (Agristack) पर अपने जमीनी अनुभव और विचार साझा किए।
कार्यशाला में शोध अध्ययन की प्रस्तुति, पैनल चर्चा, समूह चर्चा तथा PDS एवं डिजिटलीकरण पर आधारित स्किट के माध्यम से कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से संवाद हुआ। इनमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का डिजिटलीकरण, एग्रीस्टैक, स्मार्ट कृषि तथा JAM ट्रिनिटी (जन धन खाता, आधार और मोबाइल) प्रमुख रहे।
चर्चाओं में इन डिजिटल पहलों के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों और अनुभवों को समझने का प्रयास किया गया।
चर्चा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सवाल और चिंताएं सामने आईं—
🔹 PDS में समुदाय की भागीदारी: सार्वजनिक वितरण प्रणाली के डिजिटलीकरण के कारण समुदाय की भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उसकी भूमिका कमजोर हुई है। इसका प्रतिकूल प्रभाव जरूरतमंद समुदायों पर पड़ रहा है।
🔹 एग्रीस्टैक और JAM ट्रिनिटी: छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए इन डिजिटल पहलों की उपयोगिता और वास्तविक लाभ को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आईं।
🔹 डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षा: ग्रामीण समुदायों को डिजिटल फ्रॉड से बचाने के लिए जागरूकता, सुरक्षा और जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
🔹 सुविधा और वास्तविक लाभ का अंतर: मोबाइल, आधार और बैंक खाते की उपलब्धता के बावजूद ग्रामीण समुदायों को इनसे अपेक्षित लाभ मिल रहा है या नहीं, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
🔹 डिजिटलीकरण का लाभ किसे? एग्रीस्टैक, मोबाइल और डिजिटल कृषि व्यवस्था से वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है—किसानों और समुदायों को, व्यापारियों को या सरकारी संस्थाओं को? यह सवाल चर्चा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा।
इन चर्चाओं से यह बात उभरकर सामने आई कि केवल तकनीकी विकास को ही प्रगति का आधार नहीं माना जा सकता, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उसका वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति, छोटे किसानों और वंचित समुदायों तक कितना पहुंच रहा है।
डिजिटल परिवर्तन तभी सार्थक होगा, जब वह जन-केंद्रित, समावेशी, सुलभ और जवाबदेह हो। तकनीक का उद्देश्य समुदाय की भागीदारी और आजीविका को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उनके सामने नई बाधाएं खड़ी करना।
यह कार्यशाला जमीनी अनुभवों को साझा करने, शोधकर्ताओं एवं सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने और खाद्य सुरक्षा, कृषि तथा डिजिटल समावेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श का एक उपयोगी अवसर रही।
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