Thursday, 7 January 2016

लगातार प्रयास से शासन ने पहल किया


छत्तीसगढ़ राज्य में रायगढ़ अंतर्गत धरमजयगढ़ विकास खंड के ग्राम विजयनगर में लाल दास रहते है उनके नाम २०१२-१३ में एक इंदिरा आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था  |  जिसके पश्चात लालदास ने पंचायत के सचिव के कहने पर अपना घर का निर्माण पूरा कर लिया लेकिन उसे एक भी किश्त कि राशि का भुगतान नहीं हुआ | जब पंचायत के सच्सिव से कहता तो वह राशि अभी नहीं मिली ऐसा कहकर वापस भेज देता| १०-०४-२०१३ को लालदास ने जनसमस्या निवारण शिविर में अपनी समस्या को कलेक्टर के समक्ष रखा | कलेक्टर महोदय ने कार्यवाही हेतु आश्वस्त भी किया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई | इसके पश्चात २६-०८-२०१३ को जन दर्शन में पुन: कलेक्टर को आवेदन दे कार्यवाही कि माँगा की लेकिन कुछ नहीं हुआ | इसके पश्चात ग्राम विकास एवं युवा कल्याण संस्थान के कार्यकर्ताओं से लालदास ने सारी समस्या बताई तब उन्होंने १८-07-२०१४ को पंजीकृत डाक द्वारा कलेक्टर महोदय को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग तब कलेक्टर कि ओर से सचिव को इंदिरा आवास कि राशि का भुगतान करने हेतु पत्र आया | जब सचिव द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया गया तो १२-०९-२०१४ को पुन: जन सुनवाई के दौरान कलेक्टर को एक आवेदन दिया गया | इसके पश्चात अपर आयुक्त इंदिरा आवास योजना के समक्ष जन सुनवाई में लोगो ने रायपुर में आकर अपनी समस्या को रखा जिसके पश्चात राशि भुगतान हेतु आदेश किया गया लेकिन भुगतान नहीं हुआ तो फिर २४ अप्रेल २०१५ को कलेक्टर को पुन: आवेदन दिया गया जिसके बाद १९-०६-२०१५ को ४०५०० रुपए का भुगतान किया ग

स्कुल में प्रवेश मिलने से उर्मिला खुशी से झूम उठी



छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले में अंबिकापुर विकास खंड के ग्राम चितरपुर में आथिक आभाव के कारण 14 वर्षीय आदिवासी बालिका उर्मिला ने पढ़ाई छोड़ गाय भैंस चराने लगी | उसने मजबूरी में पढ़ाई छोड़ दी थी और उसे ये भी नहीं पता कि ऐसी बालिकाओं के लिए शासन शिक्षा के आधिकार के तहत निशुल्क शिक्षा कि व्यवस्था कि हुई है |
जब बाल पंचायत व श्रमिक स्वराज्य संगठन को उर्मिला के पढ़ाई छूटने के बारे में पता चला तो उन्होंने ग्राम में होने वाली बैठक में उर्मिला के पिता फगुना व माता बुधियारो को बुलाया और उसके स्कुल न जाने के कारण पर चर्चा कि तो पता चला कि वे उसके पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए सक्षम नहीं तब संगठन के लोगो ने शिक्षा के अधिकार कानून २००९ के तहत मिलने वाले लाभ के सम्बंध में जानकारी दी और उर्मिला को स्कुल भेजकर आगे और पढ़ाई कराने को कहा साथ ही मदद का आश्वासन भी दिया |
निशुल्क पढ़ाई कि व्यवस्था कि बात सुनकर उर्मिला के माता पिता का थोड़ा मन बदला लेकिन फिर उन्हें लगा कि अगर उर्मिला पढ़ने चली जाएगी तो घर का काम कौन करेगा ? कौन भैंस को चरायेगा ? लेकिन जब बाल पंचायत के बच्चे व ग्रामवासियों ने उर्मिला के पिता को बार – बार स्कुल भेजने कि सलाह देने लगे तब जाकर वह स्कुल भेजने को तैयार हो गया तब श्रमिक स्वराज संगठन के साथियो ने उर्मिला का कक्षा 6 वी में पढ़ने हेतु स्कुल में प्रवेश दिला दिया |
स्कुल में प्रवेश मिलते ही उर्मिला का चेहरा खुशी से खिल उठा उसके माता पिता के चेहरे पर भी खुशी आ गई |

बैगा समुदाय की महिलाए अपने अधिकारों के लिए संघर्ष में पुरुषो से आगे



छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले में कोटा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत बहेरामुडा में कुल ३६५ आदिवासी ,दलित व पिछड़ा समुदाय के लोग रहते है , इन परिवारों में ९० परिवार बैगा समुदाय के है जो की पी टी जी क्षेणी के तहत आते है , जिन्हें भारत सरकार के प्रथम राष्ट्रपति द्वारा वर्ष १९५२ में विशेष संरक्षित जाति घोषित किया गया था |
इस ग्राम पंचायत में ये बैगा परिवार के पूर्वज १९४७ के पूर्व से ही वन भूमि पर काबिज होकर निवास करते आ रहे है , वर्ष १९७० में वन विभाग ने इन परिवारों को जंगल से बाहर लाकर ५-५ एकड़ भूमि देकर बसा दिया |
वर्ष २००१ में वन विभाग द्वारा इनके भूमि पर बॉस के पौधे का रोपड़ करा कर इन्हें जमीन से बेदखल कर दिया गया | वन विभाग के इस कार्यवाही का ग्राम की बैगा समुदाय की महिलाओं ने संगठित होकर विरोध करने का निर्णय लिया और विभाग द्वारा लगाए गए बॉस के पौधो को उखाड़ के फेक दिया और अपने भूमि पर खेती किसानी कर अपने परिवार का जिविको पार्जन करने लगे |
३१-१२-२००७ को वन विभाग द्वारा ग्राम की २६ बैगा महिलाओं के बिरुद्ध भारतीय वन अधियम १९२७ के तहत वाद दायर किया गया इन महिलाओं पर वन भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया | जिस पर बैगा महिलाओं ने संगठित होकर क्षितिज संस्थान के साथ मिलकर न्यायालय – न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोटा जिला बिलासपुर में एक वर्ष तक केश लड़ा अंत में न्यायालय ने इन महिलाओं को दोष मुक्त कर वाद खारिज कर दिया |
क्षितिज संस्थान के सहयोग से ग्राम की इन बैगा परिवारों की महिलाओं ने वन अधिकारों की मान्यता कानून २००६ के तहत वन भूमि अधिकार पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन किया लेकिन अभी तक भूमि का अधिकार पत्र प्राप्त नहीं हुआ है | ये महिलाए लगातार संगठित होकर अपने भूमि के अधिकार प्राप्ति के लिए संघर्षरत है इसके सम्बन्ध में मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन तक अपनी आवाज को आवेदन के माध्यम से पहुचाने का भी प्रयास किया है ,जो एक उदाहरण है अन्य ग्रामो की दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है |

अवसर व चुनौतिया – विषय पर कार्यशाला



वाणी नई दिल्ली व कासा के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वेच्छिक संस्थाओं कि राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया गया | इस कार्यशाला में ३२ संस्थाओं के प्रमुखों ने हिस्सा लिया | इस कार्यशाला में वर्तमान में स्वेच्छिक संस्थाओं के समक्ष मुददे व चुनौतिया ,* स्वेच्छिक संस्थाओं के परिपेक्ष्य में ऍफ़.सी.आर.ए.,इनकम टेक्स व अन्य कानूनी विषयों ,* संस्थाओं का वैधानिक ढांचा *कारपोरेट सामाजिक दायित्व कि वर्तमान स्थिति * वर्तमान चुनौती पूर्ण स्थिति में स्वेच्छिक संस्थाओं को अपने आंतरिक स्वशासन / पारदर्शिता  के नए परिस्थिति को समझाने ,* संस्थागत अनुकूल वातावरण ,आतंरिक स्वशासन का ढांचा ,आचार संहिता के सम्बन्ध में संवाद ,* भविष्य कि रणनीति  विषयों पर चर्चा कर समाधान के हल ढूढने का प्रयास किया गया |
कार्यशाला में उपरोक्त बिन्दुओ पर चर्चा करते हुए आचार संहिता हेतु सभी ने मिलकर स्थानीय स्तर पर सूचकांक बनाए जिनमे कानूनी दस्तावेज ,निति ,पारदर्शिता ,स्वशासन , अपडेट व सीख ,जबाबदेही ,उत्तरदायित्व , सहभागी , स्थायित्व , जेंडर ,स्वतंत्र ,नेट्वर्किंग तय किए गए |

अनुकूल वातावरण निर्माण हेतु संस्थाओं को  सरकार के साथ जुड़ाव ,अधिकार मूलक काम करने की जगह तैयार करना ,सरकार के साथ संवाद ,क्रियान्वयन का कानूनी ढांचा ,हितग्राही का सहयोग ,राज्य का आत्मसात ,मुद्दों पर समझ ,सहयोगी राजनीतिज्ञ ,सामुदायिक संगठन इन सभी बिन्दुओ पर काम करने की जरूरत है |
वाणी और सहयोगी संस्थाए आगे क्या क्या काम मिलकर करेंगी इस पर चर्चा करते हुए सुनिश्चित किया गया कि ,आनलाइन पंजीयन व फ़ार्म २७-२८ जमा करने हेतु नियम बनावाए जाए , सी एस आर से सम्बंधित अध्ययन, डाटा संकलन व एडवोकेसी किया जाए , वाणी कि मेम्बर कि संख्या को बढाया जाए ,प्रत्येक सदस्य कम से कम १० नए सदस्य जोड़े ,साथ ही जिले स्तर पर भी सदस्य संख्या बधाई जाए , एन.जी.ओ.के स्व- प्रमाणीकरण के लिए एप्स बनाया जाए , गुड गवर्नेंस का पायलट टेस्टिंग २-४ संस्थाओं में करके इन्डिकेटर बना सकते है ,इन्डिकेटर पर सुझाव दे सकते है , नक्शल व अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले एन जी ओ की स्थिति को ध्यान में रखकर सरकार के साथ संवाद स्थापित कर सरकार व स्वेच्छिक संस्थाओं के संबंधो को सुधारा जाए , डाटा संकलन व एनालिसिस अच्छा होना चाहिए ,अच्छे केश स्टडी का संकलन किया जाए ,राज्य स्तर से ई न्यूज लेटर का प्रकाशन किया जाए ,जिसके लिए सभी संस्थाए अपने अपने क्षेत्रो से अच्छी अच्छी केश स्टडी संकलित कर भेजे ,वाणी से जुड़े लोगो कि नियमित त्रैमासिक बैठक, सरकार के साथ नियमित मुद्दा आधारित संवाद स्थापित किया जाए|



यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...