Thursday, 10 March 2016

चमरीन बाई के प्रयास से ग्राम में काम शुरू हुआ



छत्तीसगढ़ राज्य के धमतरी जिला में स्थित ग्राम हर्राकोथी निवासी चमरीन बाई सिन्हा अपने ग्राम की निरस्त किए राशन कार्ड को पुन: जोड़ने, आधार कार्ड बनाने ,स्मार्ट कार्ड बनाने,मनरेगा के तहत काम खुलवाने हेतु पंचायत से लेकर जनपद व जिला पंचायत यहाँ तक की कलेक्टर से भी आवेदन देकर समस्याओं का निराकरण करने की माँग की चमरीन बाई के बार कलेक्टर से मिलने व मांग करने से ग्राम में मनरेगा के तहत काम शुरू किया जिससे काफी लोगो को मजदूरी करने के लिए काम प्राप्त हुआ जिससे उनके घर का जीविकोपार्जन सुचारू रूप से चलने लगा |
                        साभार : रचना मंच –धमतरी

समस्याओं का अम्बार व सुविधाओं का आभाव



बिहार राज्य के वैशाली जिला अंतर्गत लालगंज प्रखंड पुरखौली पंचायत के समसपुरा गाँव में रहने वाली चैती देवी का दिनांक ६ जनवरी २०१६ को भूख से मौत के खबर की वास्तविक स्थिति का पता लगाने हेतु स्वेच्छिक संस्थाओं की ओर से जांच दल का गठन किया गया जिसमे मानव अधिकार संगठन पैरवी नई दिल्ली के दीनबंधू वत्स जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र समस्तीपुर से सुरेन्द्र कुमार, बिहार लोक अधिकार मंच समस्तीपुर से सुश्री सोनाली कुमारी ,समाजवादी महिला महा सभा समस्तीपुर से श्रीमती अंजू कुमारी ,अखंड एकता समस्तीपुर के निदेशक श्री राजीव गौतम व औलिया ,अध्यात्मिक अनुसंधान केंद्र वैशाली के सचिव श्री रामकृष्ण को शामिल किया गया |
यह दल दिनांक २५ जनवरी २०१६ को ग्राम समसपुरा पहुच कर वहा के प्रधान शिक्षक ,वार्ड सदस्य व कई अन्य ग्रामीण महिला पुरुषो से चर्चा किए |
चर्चा से यह पता चला की चैती को उसका पति ५ वर्ष पूर्व उसे छोड़ कर चला गया उसके बाद से उसका मौसेरा भाई उसका व उसके तीन बच्चो का पालन पोषण करता था  बाद में उसका बड़ा बेटा जो की १२ वर्ष का था झारखण्ड राज्य में जाकर ताड़ी बेचने के काम में लग गया | जिससे कमा कर अपनी माँ व भाई बहन का पेट भरता था |
समसपुरा ग्राम में शासन की कोई भी योजना सही तरीके से संचालित नहीं हो रही है राशन दूकान वर्ष में सिर्फ ४ या ५ बार ही खुलता है , सभी के राशन कार्ड डीलर के पास ही रखे रहते है | अनाज भी कम  मात्रा में देता है बोलने पर लोगो को डराता धमकाता है | आंगनबाडी भी सही तरीके से संचालित नहीं होती मनरेगा योजना के बारे में लोगो को कुछ भी नहीं पता | सरकार द्वारा घोर उपेक्षा किए जाने  के कारण ही बच्चो को बाल मजदूरी करनी पद रही है व लोग भूखे मरने को मजबूर है |
                               साभार : सुरेन्द्र कुमार (सचिव)
                    जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ,समस्तीपुर

बच्चो को मिला खिलौना



 ग्राम कचार के आंगन बाडी खिजुर पारा में नगन बाडी निगरानी समिति तथा श्रमिक स्वराज संगठन के सदस्यों के साथ बैठक करके यह चर्चा किया गया की आंगनबाडी में क्या क्या समस्याए है और बच्चो के लिए क्या चीज की समस्या है इस पर कार्यकर्ता लालो व ने बताई की हमारे आंगनबाडी में खेल सामग्री नहीं है और जो है वो भी टूटा हुआ है ,बच्चो के लिए ड्रेस सभी बच्चो के लिए नहीं है और आंगनबाडी के पास हैण्ड पम्प भी नहीं है | चर्चा के बाद प्रेरक पन्मेस्वरी ने प्रयोजना के लिए आवेदन बनाई और निगरानी समिति से हस्ताक्षर करवाई तथा संस्था के सुपरवाइजर सिकन्दर को दी और वह जाकर प्रयोजना में दिया और फिर दो – तीन दिन बाद प्रयोजना से श्रीमती लालो को फोन लगा कर बोली की आंगनबाडी की शिकायत आया है आप अपने निगरानी समिति के सदस्यों को लेकर लुन्ड्रा आओ बोली |
ग्राम कछार के खिजुर पारा की आंगनबाडी कार्यकर्ता वंहा के निगरानी समिति के सदस्यों को लेकर लुन्ड्रा गई फिर प्रयोजना के साथ चर्चा किया गया की ये आवेदन किसने बनाई है | फिर कार्यकर्ता ने कहा की शिकायत नहीं है
ये मांग है की जहा कुछ कमी रहती है वंहा सार्थक जन विकास संस्थान के सदस्यों द्वारा आवेदन बनाकर किया जाता है तो यह काम प्रेरक पन्मेस्वरी ने बच्चो के लिए किया है | तब प्रयोजना ने बोली ठीक है आप लोग खिलौना व ड्रेस १० सेट बच्चो के लिए ले जाओ फिर बाद में टाट पत्ती और वजन मशीन आएगा तो आपके आगन बाडी निगरानी समिति तथा श्रमिक स्वराज के प्रयास से बच्चो को खिलौना तथा १० सेट ड्रेस मिला |
                           साभार :सार्थक जन विकास समिति

लोक सहभागी मंच द्वारा आयोजित ग्राम स्वावलंबन यात्रा



छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुए इतने वर्ष हो गए फिर भी आज भी कई ऐसे ग्राम है ,जहा पर समस्याओं का भारी अम्बार लगा हुआ है | लेकिन सरकार सिर्फ हवा में विकास के ढोल पिटती रहती है | कुछ ऐसे जिले व ग्राम है जहा आज भी सरकार के नुमाइंदे नहीं पहुचे है योजनाए थोड़ी बहुत बन कर ग्राम पंचायतो के माध्यम से जाती है तो वे भ्रष्टाचार की भेट चढ़ जाती है ऐसे में विकास और वो भी आदिवासी व अति पिछड़े समुदायों का विकास कोशो दूर है और सब कोरी बाते है |
क्षेत्र की इन्ही समस्याओं को देखते हुए लोक सहभागी मंच व सहयोगी संस्थाओं द्वारा अपने अपने क्षेत्र में १० दिवसीय पदयात्रा का आयोजन किया गया जो अलग –अलग जिलो में ६ फरवरी से प्रारम्भ होकर २८ फरवरी तक चला | यह यात्रा कोरबा जिले के पोडी उपरोड़ा ,सरगुजा जिले के अम्बिकापुर मैनपाट ,गरियाबंद जिले के छुरा ,धमतरी जिले के नगरी ,जांजगीर चाम्पा जिले के डभरा व बिलासपुर जिले के कोटा विकास खंड में सृजन केंद्र ,क्षितिज समाज सेवी संस्था , रचना मंच ,ग्राम अधिकार मंच ,जन सेवा समिति व ग्रामोद्धार सेवा समिति के द्वारा आयोजित किया गया |
पदयात्रा पश्चात किसी विकास खंड में एस डी एम् व किसी विकास खंड में जिला पंचायत अध्यक्ष को मांग पत्र सौप कर समस्याओं के निराकरण की मांग की गई |
इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही की स्थानीय जन प्रतिनिधियों में बढचढ कर यात्रा को सहयोग दिया |

Thursday, 7 January 2016

उदाहरण प्रस्तुत किया ग्रामीणों ने कि "संगठन में शक्ति है "



जांजगीर चम्पा जिले के डभरा विकास खंड में विकलांग संघ का गठन वर्ष २००६ में किया गया | संघ के स्थापना के समय २० सदस्य थे | अभी वर्तमान में ६० सदस्य है | विकलांगो द्वारा अपने – अपने ग्राम में अपने स्तर पर पेंशन के लिए आवेदन दे रहे थे ,परन्तु एक वर्ष तक किसी को भी पेंशन नहीं मिला , तब सभी ने विकलांग संघ के माध्यम से सभी का प्रमाण पत्र बनवाए व सामूहिक रूप से आवेदन तैयार कर , जनपद पंचायत डभरा में सामूहिक रूप से आवेदन तैयार कर जमा किए फिर उसे बार – बार जाकर दबाव बनाते रहे तब जाकर अप्रेल २००८ में २४ लोगो को पेंशन मिलना प्रारम्भ हो गया और शेष लोगो का आवेदन लगाया गया है | विकलांग संघ का माह में एक बार प्रत्येक माह कि ५ तारीख को बैठक किया जाता है और इसमे जो भी नए बिकलांग आते है , उन्हें पेंशन ,प्रशिक्षण प्राप्त करने , लों प्राप्त करने हेतु मार्गदर्शन किया जाता है | इस प्रकार पिछले २ वर्षो से भटक रहे विकलांगो को उनके संगठित प्रयास से स्थानीय समस्याओं का समाधान स्वयं करने लगे है |

खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता

Writing खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता 📍 जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS), गनियारी, बिलासपुर, छत्...