Wednesday, 25 June 2025

नशा शरीर के साथ - साथ परिवार व समाज का नाश कर देता है

नशा शरीर का ही नही अपितु पूरे परिवार का नाश कर देता है । समाज मे यह जहर की तरह फैल रहा है । बहुत से युवा इसकी चपेट में आ जा रहे और अपना भविष्य खराब कर ले रहे । 
संयुक्त राष्ट्र ने नशीली पदार्थों के उपयोग पर रोक थाम करने, नशे खिलाफ लोगों में जागरूकता लाने तथा नशे के व्यापार को रोकने वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करता है । 
इस दिवस को मनाने का उद्देश्य एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना जो नशा मुक्त हो, जिसमे समुदायों को शिक्षा,रोकथाम और पुनर्वास के माध्यम से सशक्त किया जाए । 
नशा निषेध दिवस' को मनाने के पीछे उद्देश्य लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है. नशीली दवाओं का सेवन करने से शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान होता है. इस दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में खासतौर पर युवाओं के लिए नशे के रोकथाम, उपचार और पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाता है. 

सीताफल के पेड़ में फल देख किसान प्रसन्न

कहते हैं न कि मेहनत का फल बड़ा मीठा होता है । यह बात बिल्कुल सच है .
यहां हमारे किसान भाई ने वृक्षारोपण अभियान में मिले पौधे का रोपण किया जो अब फल देने लगा है और सच यह फल बहुत ही मीठा होता है । 
वृक्षारोपण अभियान के तहत लगाया गया सीताफल अब फल देने के लिए तैयार हो गया है । अभी दो तीन फल लग गए है । 
अधिकांश जगह पर इसे सीताफल ही कहा जाता है लेकिन कई जगहों पर ये शरीफा के नाम से भी जाना जाता है । पकने के बाद खाने में बहुत मीठा लगता है। 
इसके फल में बीज की मात्रा अधिक होती है और आसानी से बीज उग भी जाते हैं । 
लोगों को अच्छे फल खाने को मिले और इसे बाजार में बेचकर आय अर्जित कर सके । इसलिए इसका वृक्षारोपण कराया जा रहा है । ये फल औषधीय गुणों से भरपूर है ।
सीताफल की तासीर ठंडी होती है। इसमें कैल्शिम और फाइबर जैसे न्यूट्रिएंट्स की मात्रा अधिक होती है जो आर्थराइटिस और कब्ज जैसी हेल्थ प्रॉब्लम से बचाने में मदद करता है। 
साथ ही इसके पेड़ की छाल में टैनिन होता है जिसका इस्तेमाल दवाइयां बनाने में होता है। इस पेड़ के पत्तों से कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता है। 
सीताफल ज्यादा उपयोग करने से यह मोटापे को बढ़ावा देता है सीताफल को सर्दी जुखाम में नहीं खाना चाहिए तथा इसे सुबह सुबह खाली पेट नहीं सेवन करना चाहिए सीताफल की तासीर ठंडी होने के कारण यह शरीर में सर्दी जुखाम को बढ़ावा देता है। 
पुराने समय में इसके बीजों को निकालकर और पीसकर इनकी बीजों को सर पर लगाया जाता था तथा जिससे सर के जुएं मर जाते हैं।

खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता

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