Thursday, 22 May 2025

Change of Story - When they got organized, there was a change in the village

Budhram Korwa, one of the founding members of Gram Adhikar Manch who comes from the Pahari Korwa community, how he gained knowledge through the training related to the Manch and using that knowledge, he was able to bring about many changes in himself and his village.
We were able to ensure electricity, roads and water. This was possible by making organized efforts. We also got work and if we did not get wages on time, we fought for it and got the wages.
When he came forward in leadership, he also represented the Panchayat, became Panch twice and was also Deputy Sarpanch twice. Respect increased in the meetings of Panchayats and all this is the contribution of the organization and Gram Adhikar Manch.

https://youtube.com/shorts/WAovwsh9xF8?si=tfkY16PYMkh1fd62

One Birth One Plant Campaign

On the occasion of International Biodiversity Day 2025, the people's organization Gram Adhikar Manch, run by Anmol Foundation, planted *One Birth One Plant* in 10 villages in the name of those members of the forum who have children of 1 year or less than 1 year of age in their homes.


Under the leadership of Rakesh, the men and women of the village planted saplings together
The objective was that when the child grows up, he should himself use the fruit of the plant named after him so that his health remains good and his livelihood is secure.
Along with this we should also get inspiration that we too have to work for the environment.
#environment #cg #government #forest #plant #tree #saveearth #savelife #savewater #saveforest

Sunday, 18 May 2025

पुदीने की खेती से आय अर्जित की जा सकती है

पुदीने की खेती (पुदीना हरा) के लिए शीतोष्ण और ठंडी जलवायु आदर्श होती है। पुदीना को बलुई दोमट या चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है। इसे बीज या रोपाई से उगाया जा सकता है। पुदीना 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है। 

पुदीना बलुई दोमट या चिकनी मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ता है। पुदीना बीज या रोपाई से उगाया जा सकता है। बीज से उगाए गए पौधे विभिन्न प्रकारों के बीच संकरण कर सकते हैं, इसलिए विशिष्ट किस्मों के लिए स्थापित पौधे खरीदना बेहतर है। 

पुदीना 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है। जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जाएं, तब कटाई करें। पुदीना ऐसी फसल है जिसे काटने के बाद हर 20 दिन में दोबारा पत्तियां उग आती हैं। 

नौकरी नहीं मिली तो खेती से कमाई कर रहे लाखों रुपए

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के नवानगर ग्राम पंचायत के हरिजन पारा में रहने वाले मकरध्वज पैकरा ने 10वी  तक पढ़ाई कर नौकरी के लिए काफी प्रयास किया लेकिब जब नौकरी नहीं मिली तो फिर खेती के लिए विचार करना शुरू किया । उसी संस्था ग्राम अधिकार मंच द्वारा किसानों को एक्सपोजर के द्वारा रेनुकूट के पास एक एनजीओ में ले जाया गया जहां खेती करने के बहुत सारे तरीके देखे और सीखे । एक्सपोजर में तो कई गांव से कई किसान गए थे लेकिन नवानगर में सिर्फ मकरध्वज ने ही आने के बाद कृषि कार्य को अपनाया । 

मकरध्वज पहले एक एकड़ में अदरक की खेती से शुरुआत किया था आए अच्छा मुनाफा हुआ तो रुचि और बढ़ गई और फिर मिर्ची, बैगन, टमाटर और धान तथा गन्ने की फसल लेना शुरू किए हर साल एक -एक फसल बढ़ाते चले गए । एक एकड़ में लगभग 10 से 15 हजार रुपए खर्च होता है और उससे 80 से 90 हजार रुपए कमाई हो जाता है इस तरह अलग अलग खेती करके लाखों रुपए सालाना कमा रहे है । इस खेती में मकरध्वज स्वंय व उनकी पत्नी और दो बच्चे तथा बहुये सभी मदद करती करती है । खेती से पूरे परिवार को रोजगार मिला हुआ है । सुबह 4 बजे भोर से पूरा परिवार खेती के कामों में जुट जाता है । शाम को बैगन तोड़कर लाए कुछ रात में खराब बैगन की छटनी की कुछ सुबह 4 बजे से उठाकर पूरा परिवार लगा रहा  सुबह गाड़ी आई और मंडी भेज दिए आए परिवार खेत चला गया । दिन रात मेहनत का परिणाम इन्हें सफलता की राह पर ले आया । अभी संस्था की मदद से मशरूम उत्पादन भी शुरू करने वाले है । इनकी मेहनत और सफलता को देखते हुए गांव में और भी लोग कृषि को अपनाकर नई नई पद्धतियों का उपयोग कर कृषि कार्य कर रहे है । आज मकरध्वज अपने गांव व आसपास के गांव के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए है और दुसरों को भी मेहनत कर खेती को बढ़ाने की सलाह देते हैं 

तेंदूपत्ता की तोड़ाई का समय बढ़ाया जाना चाहिए

अक्षय तृतीया के बाद तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू होती है उसके बाद ही लोग तेंदूपत्ता की तोड़ाई करते है ताकि बेच सकें । कुछ साल पहले तक तेंदूपत्ता की खरीदी महीने भर लगभग होती थी अब सिर्फ एक हप्ते या 15 दिन ही होती है जिससे लोग अच्छी आय नही कर पाते । 

वन आधारित आजीविका के स्रोतों में से एक स्रोत है तेंदूपत्ता जिसके पौधों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है इसके कई कारण हो सकते है जैसा संग्रहको ने बताया कि कुछ तो पेड़ों के काटे जाने से कमी आई और कुछ जंगल मे आग की वजह से कमी आई । 

वैसे तेंदूपत्ता तोड़ाई से पहले प्रूनिंग की भी व्यवस्था हैओ लेकिन जिम्मेदार इसे अब कराते ही नही है। प्रूनिंग समय पर हो जाए तो अच्छे पत्ते पेड़ों पर निकलते है जिससे ज्यादा पत्ते तोड़ाई हो पाते है । कम तोड़ाई होने से लोगों को नुकसान हो ही रहा है साथ ही सरकार को भी नुकसान होता है लेकिन कोई फर्क नही पड़ता । 

लोगों की इच्छा है कि जनभागीदारी से पौधे लगाए जाएं ताकि खरीदी का समय भी बढ़ाया जाना चाहिए ताकि गर्मियों में जब उनके पास खेती नही होती उस समय इससे अच्छी आय अर्जित कर सके जिससे आजीविका सुरक्षित हो सके । 

#forest #tendupatta #pruning #environment #livelihood #income #empowerment 

Wednesday, 14 May 2025

प्रकृति हमारी निःस्वार्थ सेवा करती है

पौधरोपण के नाम पर वृक्षारोपण के नाम पर लोग वृक्ष तो खूब लगाते है लेकिन वो वनों में परिवर्तित होते नजर नहीं आ रहे । 
प्राकृतिक वन आए प्राकृतिक वृक्षों का अपना महत्व है चिड़िया भी घोसला वहीं बनाती है जहां उसे सुरक्षा महसूस होता है जो उसके अनुकूल होता है और उसके अनुकूल सिर्फ पारम्परिक वृक्ष ही होते है । वो कभी कलमी पौधे या आधुनिक समय के पौधो पर घर नही बनाते यहां तक कि नन्हे नही जीव भी उसपर आश्रय नही बनाते । 
प्राकृतिक पौधों में ठंडक होती है घनत्व होता है जो छाया देता है तो साथ मे शीतलता भी प्रदान करता है । 
प्राकृतिक पौधों का जो जड़ होता है वो मिट्टी के छरण को रोकता है अधिकांश प्राकृतिक पेड़ पौधे दवाइयों के काम आते है जो फलदार होते है वो फल देते है उनके फल भी सेहत के फायदेमंद होते उनमें विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते है । जो फल नहीं भी देते है उनमें से भी अधिकांश मेडिसिनल होते है । 
प्रकृति की संरचना ऐसी है कि पत्थर , बालू, मिट्टी, घास, पेड़ - पौधे, छोटी -छोटी झाड़ियां सभी आपस मे एक दूसरे के बहुत ही घनिष्ट मित्र होते है और आपसे में एक दूसरे की मदद करते है । और ये सब सिर्फ आपस मे मित्र नही होते बल्कि वे हम मनुष्यों के भी बहुत अच्छे दोस्त होते हैं । 
हम उनके दोस्ती को नहीं समझते हैं और उन्हें थोड़े से लालच के लिए नष्ट करते जा रहे हैं । 
हम सबको उनकी दोस्ती और प्रेम को समझना होगा उनके निस्वार्थ सम्मान व समर्पण को समझना होगा उन्हें गले लगाना होगा उन्हें बचाना होगा । 

Tuesday, 6 May 2025

मैट्स में एक युद्ध नशे के विरुद्ध व बाल विवाह मुक्त रायपुर विषय पर कार्यशाला सम्पन्न

महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर व मैट्स यूनिवर्सिटी रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में *एक युद्ध नशे के विरुद्ध व बाल विवाह मुक्त रायपुर* विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर अतिथि शामिल अपने शासन की पहल, कानून व्यवस्था व अनुभव साझा किए ।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि डॉक्टर दिनेश मिश्रा नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति , साथ ही अन्य अतिथिगणों में विपिन ठाकुर राज्य समन्वयक बचपन बचाओ आंदोलन संजय जी महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर व डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर सदस्य बाल संरक्षण समिति व  डॉक्टर दीनानाथ यादव विभागाध्यक्ष समाज कार्य मैट्स यूनिवर्सिटी रायपुर शामिल रहे । 
प्रतिभागियों में मैट्स यूनिवर्सिटी के छात्र - छात्राओं ने भाग लिया 

यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...