*जन जुड़ाव* अनमोल फाउंडेशन द्वारा संचालित एक ऐसा मंच है जो जमीनी स्तर किए जा रहे छोटे छोटे स्वेच्छिक प्रयासों की सफल कहानियों, शासकीय योजनाओं व जनहित से जुडी कानूनी जानकारियों को संग्रह कर प्रसारित करने हेतु तैयार किया गया है
Thursday, 22 May 2025
Change of Story - When they got organized, there was a change in the village
One Birth One Plant Campaign
On the occasion of International Biodiversity Day 2025, the people's organization Gram Adhikar Manch, run by Anmol Foundation, planted *One Birth One Plant* in 10 villages in the name of those members of the forum who have children of 1 year or less than 1 year of age in their homes.
Under the leadership of Rakesh, the men and women of the village planted saplings together
The objective was that when the child grows up, he should himself use the fruit of the plant named after him so that his health remains good and his livelihood is secure.
Along with this we should also get inspiration that we too have to work for the environment.
#environment #cg #government #forest #plant #tree #saveearth #savelife #savewater #saveforest
Sunday, 18 May 2025
पुदीने की खेती से आय अर्जित की जा सकती है
पुदीने की खेती (पुदीना हरा) के लिए शीतोष्ण और ठंडी जलवायु आदर्श होती है। पुदीना को बलुई दोमट या चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है। इसे बीज या रोपाई से उगाया जा सकता है। पुदीना 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है।
पुदीना बलुई दोमट या चिकनी मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ता है। पुदीना बीज या रोपाई से उगाया जा सकता है। बीज से उगाए गए पौधे विभिन्न प्रकारों के बीच संकरण कर सकते हैं, इसलिए विशिष्ट किस्मों के लिए स्थापित पौधे खरीदना बेहतर है।
पुदीना 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है। जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जाएं, तब कटाई करें। पुदीना ऐसी फसल है जिसे काटने के बाद हर 20 दिन में दोबारा पत्तियां उग आती हैं।
नौकरी नहीं मिली तो खेती से कमाई कर रहे लाखों रुपए
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के नवानगर ग्राम पंचायत के हरिजन पारा में रहने वाले मकरध्वज पैकरा ने 10वी तक पढ़ाई कर नौकरी के लिए काफी प्रयास किया लेकिब जब नौकरी नहीं मिली तो फिर खेती के लिए विचार करना शुरू किया । उसी संस्था ग्राम अधिकार मंच द्वारा किसानों को एक्सपोजर के द्वारा रेनुकूट के पास एक एनजीओ में ले जाया गया जहां खेती करने के बहुत सारे तरीके देखे और सीखे । एक्सपोजर में तो कई गांव से कई किसान गए थे लेकिन नवानगर में सिर्फ मकरध्वज ने ही आने के बाद कृषि कार्य को अपनाया ।
मकरध्वज पहले एक एकड़ में अदरक की खेती से शुरुआत किया था आए अच्छा मुनाफा हुआ तो रुचि और बढ़ गई और फिर मिर्ची, बैगन, टमाटर और धान तथा गन्ने की फसल लेना शुरू किए हर साल एक -एक फसल बढ़ाते चले गए । एक एकड़ में लगभग 10 से 15 हजार रुपए खर्च होता है और उससे 80 से 90 हजार रुपए कमाई हो जाता है इस तरह अलग अलग खेती करके लाखों रुपए सालाना कमा रहे है । इस खेती में मकरध्वज स्वंय व उनकी पत्नी और दो बच्चे तथा बहुये सभी मदद करती करती है । खेती से पूरे परिवार को रोजगार मिला हुआ है । सुबह 4 बजे भोर से पूरा परिवार खेती के कामों में जुट जाता है । शाम को बैगन तोड़कर लाए कुछ रात में खराब बैगन की छटनी की कुछ सुबह 4 बजे से उठाकर पूरा परिवार लगा रहा सुबह गाड़ी आई और मंडी भेज दिए आए परिवार खेत चला गया । दिन रात मेहनत का परिणाम इन्हें सफलता की राह पर ले आया । अभी संस्था की मदद से मशरूम उत्पादन भी शुरू करने वाले है । इनकी मेहनत और सफलता को देखते हुए गांव में और भी लोग कृषि को अपनाकर नई नई पद्धतियों का उपयोग कर कृषि कार्य कर रहे है । आज मकरध्वज अपने गांव व आसपास के गांव के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए है और दुसरों को भी मेहनत कर खेती को बढ़ाने की सलाह देते हैं
तेंदूपत्ता की तोड़ाई का समय बढ़ाया जाना चाहिए
अक्षय तृतीया के बाद तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू होती है उसके बाद ही लोग तेंदूपत्ता की तोड़ाई करते है ताकि बेच सकें । कुछ साल पहले तक तेंदूपत्ता की खरीदी महीने भर लगभग होती थी अब सिर्फ एक हप्ते या 15 दिन ही होती है जिससे लोग अच्छी आय नही कर पाते ।
वन आधारित आजीविका के स्रोतों में से एक स्रोत है तेंदूपत्ता जिसके पौधों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है इसके कई कारण हो सकते है जैसा संग्रहको ने बताया कि कुछ तो पेड़ों के काटे जाने से कमी आई और कुछ जंगल मे आग की वजह से कमी आई ।
वैसे तेंदूपत्ता तोड़ाई से पहले प्रूनिंग की भी व्यवस्था हैओ लेकिन जिम्मेदार इसे अब कराते ही नही है। प्रूनिंग समय पर हो जाए तो अच्छे पत्ते पेड़ों पर निकलते है जिससे ज्यादा पत्ते तोड़ाई हो पाते है । कम तोड़ाई होने से लोगों को नुकसान हो ही रहा है साथ ही सरकार को भी नुकसान होता है लेकिन कोई फर्क नही पड़ता ।
लोगों की इच्छा है कि जनभागीदारी से पौधे लगाए जाएं ताकि खरीदी का समय भी बढ़ाया जाना चाहिए ताकि गर्मियों में जब उनके पास खेती नही होती उस समय इससे अच्छी आय अर्जित कर सके जिससे आजीविका सुरक्षित हो सके ।
#forest #tendupatta #pruning #environment #livelihood #income #empowerment
Wednesday, 14 May 2025
प्रकृति हमारी निःस्वार्थ सेवा करती है
Tuesday, 6 May 2025
मैट्स में एक युद्ध नशे के विरुद्ध व बाल विवाह मुक्त रायपुर विषय पर कार्यशाला सम्पन्न
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