Wednesday, 30 November 2022

समाज सेवा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य के लिए कवर्धा के दौलत राम कश्यप को मिला ग्लोबल एचीभर अवार्ड

कवर्धा  -  संविधान दिवस के अवसर पर 27 नवम्बर 2022 को गोपाल किरण समाज सेवा संस्थान ग्वालियर मध्यप्रदेश द्वारा अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन, गुजरात में 06 वां ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड सम्मान समारोह आयोजित किया गया ! जिसमें देश भर के 100 से अधिक साहित्यकार, कवि, शिक्षक, एवं समाज सेवी जो लगातार दो दशक से अधिक समय से उस क्षेत्र में सक्रियतापूर्वक कार्य कर रहे हैं उन्हें सम्मानित किया गया  ! 
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के *दौलतराम कश्यप सामाजिक कार्यकर्ता को ग्लोबल एचीवर्स डां. भीमराव अंबेडकर अवार्ड 2022* से सम्मानित किया  ! यह सम्मान कश्यप को उनके द्वारा विगत 27 वर्षों से सामाजिक क्षेत्रों में किये गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया  ! वे दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष पिछड़ी में विशेष जनजाति बैंगाओ के आजीविका, महिला एवं बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, शांति सद्भावना, बच्चों के अधिकार पर जिला कबीरधाम, मुंगेली, राजनांदगांव जिला में सक्रिय रुप से कार्य कर रहे हैं  ! वर्तमान में कश्यप आस्था समिति के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शासन के योजना आयोग की टास्क फोर्स में सदस्य, तथा जिला एवं राज्य स्तरीय विभिन्न विषयों के मास्टर ट्रैनर के रुप में कार्य कर रहे हैं  ! इसके पूर्व में जिला कबीरधाम एवं बेमेतरा के लोकपाल मनरेगा में कार्य कर चुके हैं  ! इसके पूर्व भी श्री कश्यप को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और शासन प्रशासन के द्वारा अनेकों सम्मान से सम्मानित किया जा चुका हैं  ! जिसमें शांतिदूत जिला धमतरी, छत्तीसगढ़ रत्न, सेवा सनद सम्मान, युवा सम्मान से सम्मानित किया जा चुका हैं  ! इस सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिले एवं प्रदेशों के बुध्दिजीवीयों सामाजिक कार्यकर्ता पत्रकारों गणमान्य लोगों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं  !  जिसमें पास्कल तिर्की राष्ट्रीय समन्वयक नई दिल्ली, मोईन जाफर हुसैन राज्य समन्वयक शांति सद्भावना मंच, प्रो. आरिफ उत्तर प्रदेश, अनवर खान राजस्थान, रोज झारखंड, रामकिशोर चौहान उत्तर प्रदेश, सुबोध कुमार बिहार,अरुण उड़ीसा, रामेश्वर लश्करे मध्यप्रदेश, बैद्यनाथ वर्मा खैरागढ़, रामस्वरूप लोधी, चंद्र कुमार कश्यप बिलासपुर, मुनीव शुक्ला जांजगीर चांपा, श्याम चंद्रा शक्ति, संजय शर्मा रायपुर, मयाराम जायसवाल आस्था समिति सचिव, गोपाल प्रसाद सिंगरौल कोषाध्यक्ष आस्था समिति, आस्था समिति के सभी कार्यकर्ता उमाशंकर कश्यप, राजेश गोयल, महेश निर्मलकर, चित्ररेखा राडेकर, निशा यादव, मनिषा  जागड़े, संजय कुमार, लक्ष्मी नारायण सोनवानी, हितेश कुमार, रामलाल पटेल, लवली दास, आरती यादव, कोमल निर्मलकर आस्था समिति के कार्यकर्ता ने बधाई दी हैं  !

Tuesday, 15 November 2022

छ.ग. के विकास में स्वैच्छिक संस्थाओं का योगदान - संजय शर्मा

आज हम यहाँ इस अंक को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर समर्पित करने जा रहे है चूँकि “जन जुडाव” में हम स्वैच्छिक प्रयासों को ही स्थान देते है इस कारण इस अंक में भी हम छत्तीसगढ़ के विकास में स्वैच्छिक संस्थाओं के योगदान को लेकर अपने अनुभवो को रखने का एक छोटा सा प्रयास है | यह मेरा सौभाग्य रहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पूर्व से ही राज्य में ग्राम स्तर पर आदिवासी व गरीब समुदायों के परिवारों के बीच सामुदायिक सहभागिता से कार्य करते आ रहा हूँ | वर्ष 1994 से स्वैच्छिक क्षेत्र से जुड़ा तब से लेकर आज तक इसी क्षेत्र में अलग – अलग तरह से कार्य करते आ रहा हूँ | जब हमने प्रारम्भ किया तब यह राज्य अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा था | स्वैच्छिक संस्थाएं अविभाजित मध्यप्रदेश के समय भी कार्य कर रही थी | लेकिन संख्या बहुत ही कम थी | 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ | छत्तीसगढ़ स्थापना के बाद स्वच्छिक संस्थाओं की गतिविधियां बढ़नी शुरू हुई | क्योकि एक तो आदिवासी बाह्य राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ सामने आया दुसरा नए राज्य के स्थापना में कई प्रकार की समस्याएं सामने आती है जिनसे निपटने में मानव संसाधन व आर्थिक संसाधन की आवश्यकता पड़ती है | ऐसे में स्वैच्छिक संस्थाओं को तो आगे आना ही था | स्वैच्छिक संस्थाओं का चरित्र भी ऐसा ही रहा है | जब जब जहाँ जहां बड़ी समस्याएं आती है स्वच्छिक प्रयास बड़ी तेजी से आगे आते है और एक दुसरे की मदद कर सहारा बनते है | ठीक ऐसा ही कुछ छत्तीसगढ़ में रहा | जल जंगल व् जमीन के मुद्दों के साथ – साथ आजीविका, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण आदि कई बड़े मुद्दे तो थे ही साथ ही छोटे –छोटे मुद्दे भी अनेको प्रकार के सामने थे |
पंचायतों की बड़ी भूमिका थी लेकिन प्रतिनिधियों में अनुभवों की कमी भी एक बड़ी समस्या थी | स्वैच्छिक संस्थाएं इन्ही सारे जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर कार्य कर रही थी| लेकिन जब छत्तीसगढ़ बना तो कई राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं ने छत्तीसगढ़ में कदम रखा व जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर अलग-अलग मुद्दों पर कार्य करना शुरू किया | छत्तीसगढ़ गठन से पूर्व स्वैच्छिक संस्थाओं की संख्या बहुत ही कम थी लेकिन राज्य बन्ने के बाद स्वैच्छिक संस्थाओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई | लगभग जिलों में स्वैच्छिक संस्थाओं की उपस्थिति देखा जा सकता है | कुछ बड़ी राष्ट्रीय स्तर की व राज्य स्तर की संस्थाओं ने स्वैच्छिक संस्थाओं के क्षमता विकास की दिशा में भी व्यापक स्तर पर कार्य किया, साथ ही छोटे छोटे संसाधनों से मदद कर संस्थाओं को खडा किया ही साथ मुद्दों को लेकर एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण भी किया | इस अंक में हम उन्ही प्रयासों पर बात करेंगे | छत्तीसगढ़ एक नया राज्य होने के साथ – साथ आदिवासी बाहुल्य राज्य भी है | जब राज्य की स्थापना हुई तब यहा 16 जिले थे जो 22 सालों के सफ़र में बढ़कर 33 हो गई है | वैसे तो अविभाजित मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ की स्थिति बहुत अच्छी नही थी | उस समय अधिकाश जिले आवागमन की सुविधा से कोसों दूर थे | ग्रामों की स्थिति भी दयनीय ही थी | जबकि छत्तीसगढ़ हमेशा से खनिज व वन संसाधन से भरपूर मात्रा में रहा है | जिसका सभी शासित सरकारों ने लाभ उठाया फिर भी छत्तीसगढ़ के क्षेत्र को वो लाभ नही मिला जो मिलना चाहिए था | जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ तो वही समस्याएं विरासत में मिली जल, जंगल, जमीन, स्वास्थ्य, आजीविका, रोजगार, यातायात आदि बहुत से मुद्दे विद्यमान रहे है | इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ अन्तराष्ट्रीय स्वैच्छिक संस्थाएं जो पूर्व से कार्यरत थी जिनमे यूनिसेफ, युएनडीपी, एक्शन एड, आदि | छत्तीसगढ़ बनने के बाद ये संस्थाए राज्य में अपने कार्यालय स्थापित कर कार्यों को विस्तारित किया लेकिन इसके अलावा आई जी एस एस एस, सी आर एस, आक्सफैम इंडिया, केयर, कासा, प्रिया, समर्थन, वाणी आदि राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं ने छत्तीसगढ़ में संघन रूप से पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने, महिलाओं के सशक्तिकरण, नागरिक समाज के सशक्तिकरण, आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण के साथ शिक्षा, कृषि, वन भूमि के अधिकार, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, कुपोषण, पलायन व रोजगार की दिशा में कार्य को मजबूती देने का कार्य किया | इनमे से कुछ संस्थाओं ने छत्तीसगढ़ की जमीनी स्तर की स्वैच्छिक संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए भी कार्य किया| छत्तीसगढ़ में स्वैच्छिक संस्थाओं की स्थिति अगर एक नजर में देखने का प्रयास करें तो यहाँ कुछ अन्तराष्ट्रीय स्तर की दानदाता संस्थाएं है तो कुछ राष्ट्रीय स्तर की संस्थाए जिन्हें मदर एन जी ओ भी कहा जाता है और कुछ स्थानीय स्तर की स्वैच्छिक संस्थाएं | चूँकि स्वैच्छिक संस्थाओं का दायरा बहुत बड़ा है इसमें ग्रामीण क्षेत्रों कार्य करने वाले स्वैच्छिक संस्थाए आती है जो सोसाइटी अधिनियम के तहत पंजीकृत है या ट्रस्ट या कम्पनी एक्ट के तहत पंजीकृत है | वहीं शहरी क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में सेवा भावी संस्थाएं भी है जो क्लब के रूप में भोजन, भंडारा व नगर निगमों के क्षेत्र में स्वच्छता व पर्यावरण आदि मुद्दों पर जागरूकता आदि कार्य करती आ रही है | जमीनी स्तर की स्वैच्छिक संस्थाओं की अगर बात करें तो उनमे भी दो अलग –अलग प्रकार की संस्थाएं एक जो अपने आपको स्वैच्छिक संस्थाएं कहती है दुसरा जो अपने आपको जन संगठन कहते है | स्वैच्छिक संस्थाएं सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुचाने के लिए कार्य करती है साथ ही रचनात्मक कार्य भी सीधे करती है | वही जन संगठन शोषित व वंचित समुदाय के लोगों के कानूनी अधिकारों को दिलाने के लिए संघर्ष करती है | स्थानीय स्तर पर कार्यरत संस्थाए कुछ राज्य स्तर पर शासन के परियोजनाओं से जुड़कर कार्यरत है वाही कुछ केंद्र सरकार के साथ जुडकर उनकी परियोजनाओं के माध्यम से कार्यरत है | अगर हम देखें तो पंचायती राज अधिनियम, मनरेगा, सूचना का अधिकार कानून, शिक्षा का अधिकार कानून, खाद्य सुरक्षा कानून, वन अधिकार कानून के जमीनी स्तर पर सही क्रियान्वयन की दिशा में सैकड़ों संस्थाएं सक्रीय रूप से कार्यरत रही है और एक मुकाम तक पहुचाया भी है | कई संस्थाएं सरकार की विभिन्न परियोजनाओं में जुडकर तकनिकी विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया तो कई ने क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में | कई संस्थाओं कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए तो कई भय, भूख व् भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए | कुछ जल जंगल जमीन के मुद्दों पर तो कई स्वास्थ्य, शिक्षा व कल्याण के लिए | स्वैच्छिक संस्थाओं की सबसे बड़ी भूमिका जो मुझे दिखाई देता है वह है जरूरतमंद परिवारों, शासन व योजनाओं के बीच प्रेरणादायी/ मार्गदर्शक के रूप में पुल का काम करता है | संजय शर्मा

Friday, 14 October 2022

वरिष्ठ नागरिकों के प्रति युवाओं का संवेदीकरण होना चाहिए - ज्ञानेश शर्मा

*भारत सरकार के समाज कल्याण विभाग के तत्वाधान में योग व फिजियोथेरेपी के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा* विषय पर रोहनीपुरम स्थित राम मंदिर प्रांगण हाल में एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन *रीजनल रिसोर्स एवं ट्रेनिंग सेंटर (RRCT) मुंबई,  सेंटर फॉर द स्टडी आफ सोशल चेंज (CSSC) मुंबई, हेल्पेज इंडिया छत्तीसगढ़ व सीनियर सिटीजन सोशल  वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किया गया।*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए *मुम्बई की पूर्व डिप्टी मेयर श्रीमती निर्मला सावंत* ने वरिष्ठ नागरिकों के  लिए बनाए गए माता पिता भरण पोषण अधिनियम 2007 के सम्बंध में जानकारी देते हुए अपने अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम के *मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य योग* *आयोग के अध्यक्ष श्री ज्ञानेश* शर्मा*द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के सम्बंध में हेल्पेज इंडिया के राज्य प्रमुख शुभांकर विस्वास जी ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, हेल्प लाइन के माध्यम से दिए जा रहे सुविधाओं की जानकारी दी ।
 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ज्ञानेश शर्मा जी ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ होने वाले अपराधों पर दुख व्यक्त करते हुए युवाओं के संवेदीकरण का आवाहन किया। उन्होंने योग के माध्यम से व व्यक्तिगत स्तर पर हर वरिष्ठ नागरिक को सहयोग करने का आश्वासन दिया।

Sunday, 2 October 2022

सतत उपभोग, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध एवं ई-वेस्ट प्रबंधन पर ग्रीन एक्शन वीक का अभियान का आयोजन 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2022 तक

जयपुर 3, अक्टूबर 2022 - हर साल अक्टूबर के पहले सप्ताह (3 से 9 अक्टूबर) के दौरान मनाया जाने वाला “ग्रीन एक्शन वीक” सतत उपभोग को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक अभियान है | वर्ष 2022 के दौरान इस अभियान को करीब 60 संस्थाओं के द्वारा आफ्रीका, एशिया, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के 40 देशों में मनाया जा रहा है | ग्रीन एक्शन वीक अभियान स्वीडिश सोसाइटी फार नेचर कंजर्वेशन की एक अनूठी पहल है जो भारत में जयपुर स्थित प्रमुख उपभोक्ता संस्था कट्स इन्टरनेशनल द्वारा पुरे देश में संचालित की जा रही है |
वर्ष 2018 से अब तक इस अभियान की थीम शेयरिंग कम्युनिटी रखी गई है | अभियान के तहत साझा करने एवं सहयोग करने की संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है | इस वर्ष अभियान का उद्देश्य साझा और सहयोग के माध्यम से सभी को सामान एवं सतत उपभोग की सेवाएं प्रदान करने एवं मनुष्य तथा पृथ्वी के फायदे के लिए है |

    

हाल ही में भारत में 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं उपयोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है | वर्ष 1950 से 2015 तक विश्व स्तर पर लगभग 8.3 बिलियन मीट्रिक टन प्लास्टिक उत्पादित किया गया था एवं इसका 80 प्रतिशत 6.3 बिलियन मीट्रिक टन कचरे के रूप में दर्ज किया गया था | संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार प्लास्टिक प्रदुषण वर्ष 1950 में दो मिलियन टन था जो बढ़कर वर्ष 2017 में 348 मिलियन टन हो गया, जो कि 522.6 विलियन डालर वैश्विक उद्योग बन गया | केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना 35 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, वर्ष 2040 तक इसकी क्षमता दो गुनी होने की उम्मीद है |

वर्ष 2019 में विश्व में 53.6 मिलियन मीट्रिक टन ई - कचरा दर्ज किया गया, जिसमे से एशिया का हिस्सा सबसे ज्यादा 24.9 मीट्रिक टन था | भारत, चीन और अमेरिका के बाद ई-कचरे का तीसरा बड़ा उत्पादक है, जो कि 3.2 मीट्रिक टन तथा प्रति व्यक्ति 2.4 किलो है | सरकार की पहल के बावजूद इस ई कचरे का 90 प्रतिशत अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा प्रतिबंधित किया जाता है | कट्स के निदेशक जार्ज चेरियन ने बताया की इस साल का अभियानसिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध के प्रभावी क्रियान्वयन, ई कचरे के उचित प्रबंधन और लोगों को सत् उपभोग के तरीकों के बारे में शिक्षित करने पर केन्द्रित है |

ग्रीन एक्शन वीक अभियान के संचालन के लिए कट्स इंटरनेशनल 14 राज्यों में 14 स्वंय सेवी संस्थाओं के साथ भागीदारी और समर्थन कर रहा है | ग्रीन एक्शन वीक अभियान राजस्थान के अलावा आँध्रप्रदेश,असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमांचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा,तमिलनाडु, तेलंगाना,त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड में गतिविधयां संचालित की जा रही है छत्तीसगढ़ में यह अभियान अनमोल फाउंडेशन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है | चेरियन ने बताया कि यह अभियान सतत उपभोग पर काम करने वाली संस्थाओं का एक नेटवर्क बनाने में मदद करेगा तथा सामूहिक पैरवी के प्रयासों को मजबूत बनाने तथा सतत उपभोग की आदतों में बदलाव लाकर सतत भविष्य की ओर अग्रसर करेगा |

Thursday, 8 September 2022

सामुदायिक सहभागिता से ही पर्यावरण संरक्षण सम्भव

अनमोल फाउंडेशन द्वारा  रायपुर स्थित होटल मयूरा में कट्स इंटरनेशनल जयपुर व स्वीडिश सोसाइटी फार नेचर कंजर्वेशन के सहयोग से *ग्रीन एक्शन वीक अभियान  इंडिया 2022* के अंतर्गत सामुदायिक साझाकरण को बढ़ावा देने हेतु एक दिवसीय स्टेकहोल्डर्स कार्यशाला का आयोजन किया गया । उक्त कार्यशाला में 54  शासकीय अधिकारी, एन जी ओ व समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । 
कार्यक्रम बतौर मुख्य अतिथि श्री हरबंश सिंह मिरी  छ ग प्रदेश कंवर समाज के सामाजिक अध्यक्ष एवं (संयुक्त ककेक्टर) कंट्रोलर राजभवन व अतिथि एवं तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में क्रेडा छत्तीसगढ़ के मुख्य अभियंता श्री संजीव जैन जी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से एग्रो- मेट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर जी के दास, छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर श्री अजय मालू, कट्स इंटरनेशनल के निदेशक श्री जार्ज चेरियन व एसोसिएट निदेशक दीपक सक्सेना जी, प्रेरक संस्थान के निदेशक रामगुलाम सिन्हा जी व प्रदान से कुंतल मुखर्जी जी रहे । 
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से अनमोल फाउंडेशन के निदेशक संजय शर्मा ने अनमोल फाउंडेशन के पर्यवर्णीय गतिविधियों व ग्रीन एक्शन वीक अभियान के छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रयासों व अनुभवों को
 साझा करते हुए बताया कि विगत 3 वर्षों से यह अभी फाउंडेशन रायपुर शहर में संचालित कर रहा है जिसमे लोगों को अधिक से अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने, प्लास्टिक का उपयोग न करने, कपड़े का बैग का उपयोग करने, घरेलू कचरे का निदान घर पर ही खाद बना करने व टेरिस गार्डन को बढ़ावा देने । साइकल का प्रयोग का वाहन प्रदूषण को रोकने, सौर्य ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कर विद्युत खपत को कम करने आदि के बारे में जानकारी देते हुए अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया गया । 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जार्ज चेरियन जी ने कहा कि ग्रीन एक्शन वीक अभियान को भारत देश मे 2018 से चलाया जा रहा इस वर्ष इसमे 14 राज्यों में स्वैच्छिक संस्थाओं के साथ मिलकर इस अभियान को संचालित किया जा रहा है जिसमे राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, त्रिपुरा, आसाम, सिक्किम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना राज्य शामिल है। 
उन्होंने कहा कि कोविड के समय प्लास्टिक से बने सामानों  का बहुत ज्यादा प्रयोग हुआ जिसमे मास्ट , दस्ताने, फेसशील्ड, सेनेटाइजर बॉटल व इलेक्ट्रॉनिक सामानों में लैपटॉप व मोबाइल गैजेट । केरल राज्य में 400 प्रतिशत राजस्थान में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई । इससे ई कचरा बहुत ज्यादा उतपन्न होगा । जो कि चिंता का विषय है । 
हरबंश सिंह मिरी ने सभा को छत्तीसगढ़ की संस्कृति का सम्मान बात की और अपना उद्बोधन छत्तीसगढ़ी में देकर लोगों से अपील की कि हम अपने मातृ भाषा का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें । उन्होंने हमारी ग्रामीण संस्कृति, जैविक खेती व उनके ग्राम के लोगों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सभी के साथ साझा करते हुए जानकारी दी कि उनके ग्राम में पौधरोपण को लेकर जिस तरह से अभियान चलाए जा रहे उससे जल्द ही उनका ग्राम देश का पहला ग्राम बनेगा पर्यावरण सुरक्षा के प्रयासों के मामलों में । अजय मालू जी ने बताया कि सरकार कानून बहुत सारे बनाए है काम भी हो रहा है लेकिन बिना जन भागीदारी के निराकरण कर पाना सम्भव नही होगा उन्होंने प्लास्टिक को रोकने के लिए बनाए गए कानून को सभी के साथ साझा किया साथ परंपराओं के साथ चलने की बात कही। कचरा पारम्परिक तरीके व आधुनिक तरीको पर भी बात कही । संजीव जैन जी सौर्य ऊर्जा से होने वाले फायदे के बॉर्डर में जिक्र करते हुए शासन की योजनाओं के सम्बंध में बताया सौर ऊर्जा लगा कर किस तरह विजली खपत को कम किया जा सकता साथ अपने खर्चे को भी कम किया जा सकता है । भोजन बनाने से लेकर सिचाई सुविधाओं तक सौर्य ऊर्जा उपयोग हो रहा है सिचाई छत्तीसगढ़ बहुत ही आगे है । जी के दास जी ने जैविक खेती को बढ़ावा देने भूमि की उर्वरता को सुरक्षित रखने हेतु जैविक खेती  को प्रोत्साहित करने की बात कही साथ ही उन्होंने आवश्यक सहयोग देने की बात भी कही । रामगुलाम सिन्हा जी मे जैविक खेती के माध्यम से बैगा समुदायों के उत्थान पर चर्चा करते हुए जानकारी दी । कुंतल मुखर्जी ने कृषि के माध्यम से पर्यावरण की सुरक्षा के बारे मे बताया और अपने संस्थान के अनुभवों को साझा किया । दीपक सक्सेना जी ने मॉडरेटर के रूप में सभी की बातों को संकलित करते हुए कहा कि सभी लोग अगर मिलकर प्रयास करेंगे तो निःसन्देह बेहतर लाभ मिलेगा । अंत संजय शर्मा ने सभी आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया । 

Sunday, 21 August 2022

*सुनो रायपुर* अभियान के अंतिम दिन कृष्णा पैराडाइज में कार्यक्रम

रायपुर पुलिस द्वारा साइबर क्राइम को रोकने हेतु चलाए जा रहे *सुनो रायपुर* अभियान के अंतिम दिन अनमोल फाउंडेशन द्वारा सरोना के कृष्णा पैराडाइज में कार्यक्रम आयोजन किया । जिसमें हरसंभव की ओर से पुष्पलता  त्रिपाठी व नैना जी, शामिल रही । 
कार्यक्रम में अनमोल फाउंडेशन के निदेशक श्री संजय शर्मा जी ने लोगो को साइबर क्राइम किस तरह हो रहा है उसके बारे में जानकारी देते हुए एस एम एस के माध्यम से लिंक भेज कर किए जा रहे अपराध, वीडियो कॉल, क्यू आर कोड के माध्यम से, बिजली बिल के नाम पर, ओ एल एक्स के माध्यम से किए जा रहे फ्राड, लोन के नाम पर , सोशल मीडिया के माध्यम से , व्हाट्सएप के माध्यम से ईमेल के माध्यम से किए जा रहे फ्राड के बारे में जानकारी दी गई और समाधान का तरीका बताया गया । कृष्णा पैराडाइज के निवासी बड़े ही रुचि के साथ कार्यक्रम में जानकारी ली  कार्यक्रम के लिए सरकार व जिला पुलिस की सराहना की । 

Saturday, 20 August 2022

युवाओं की जबरदस्त भागीदारी व उत्साह से *सुनो रायपुर* अभियान सफलता की ओर अग्रसर

रायपुर पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत अग्रवाल जी के नेतृत्व में 15 अगस्त 2022 से रायपुर जिले के अंतर्गत साइबर अपराध से सुरक्षा उपायों की जानकारी जन जागरूकता के माध्यम से जन जन तक पहुचाने का प्रयास किया जा रहा है । इस प्रयास में रायपुर जिले के सभी पुलिस थानों के थाना प्रभारी व पूरा पुलिस महकमा सक्रियता से जुटा हुआ। 

यह अभियान तब और ज्यादा मजबूत और ताकतवर हो जाता है जब इसमे युवाओं की भागीदारी बढ़ने लगती है , सक्रिय सहभागिता होने लगती है। ऐसा ही कुछ डीडीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत हो रहा है । 
आज पोस्ट मेट्रिक आदिवासी छात्रावास व पोस्ट ग्रेजुएट आदिवासी छात्रावास के युवाओं के डीडीनगर स्थिति छात्रावास में *सुनो रायपुर* अभियान कार्यक्रम का आयोजन छात्रावास के छात्रों के सहयोग से अनमोल फाउंडेशन के संयोजन  डीडीनगर थाना के मार्गदर्शन में सफल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनमोल फाउंडेशन के निदेशक श्री संजय शर्मा व डीडीनगर थाना प्रभारी श्री कुमार गौरव साहू जी ने साइबर क्राइम क्या है , कैसे अपराध घटित होता है तथा इससे बचने के उपायों पर व्यापक जानकारी उदाहरण व अनुभवों के साथ सरल तरीके से दी गई । सुश्री डॉली टण्डन ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित एल्डर हेल्पलाइन के सम्बन्ध में बताया । 
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने अपने शंकाओं का समाधान प्रश्नोत्तरी से किया । युवा सब इतने उत्साहित थे कि कार्यक्रम  7 बजे से 9 बजे रात तक चला । फिर युवा सुनना व जानना चाहते रहे। सभी युवाओं ने इस अभियान को आगे बढ़ाने हेतु सक्रिय भागीदारी की बात कही । 

यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...