Tuesday, 3 June 2025

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक व पर्यावरण का हितैषी मिलेट्स

मिलेट्स (Millets) मोटे अनाज होते हैं, यह अनाज एशिया और अफ्रीका के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाए जाते हैं. मिलेट्स को "श्री अन्न" के नाम से भी जाना जाता है. इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है । इसका उत्पादन पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा होता है ये कम पानी मे अच्छी उपज देते है । 
मिलेट्स कई प्रकार के होते हैं जिनमे ज्वार,बाजरा,रागी (मंडुआ), कुटकी,कोदो,सावा आदि शामिल है ।
मिलेट्स के बहुत से लाभ हैं 
1- मिलेट्स में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं
2-मिलेट्स पाचन में मदद करते हैं, वजन घटाने में मदद करते हैं और मधुमेह के लिए फायदेमंद होते हैं. 
3- मिलेट्स ग्लूटेन-मुक्त होते हैं, जो उन्हें सीलिएक रोग वाले लोगों के फायदेमंद है 
मिलेट्स को अब लोग अपने अपने तरीके से खाने में इश्तेमाल कर रहे हैं जिसमे 
1-ज्वार, बाजरा और रागी की रोटी 
2-बाजरा या रागी की खिचड़ी, पोहा 
3-मिलेट्स का पुलाव 
4-रागी की इडली
5-रागी का उपमा
6-मिलेट्स से बिस्किल व डेसर्ट भी बना रहे
7- मिलेट्स का सूप
लोग अपने अपने तरीके से उपयोग कर रहे हैं 
मिलेट्स (मोटे अनाज) को इसलिए महत्व दिया जा रहा है क्योंकि वे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, और खेती के लिए कम संसाधनों की आवश्यकता होती है. 
भारत में कृषि के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण योगदान है । पहाड़ी क्षेत्रों में कई समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण खाद्य है । सूखा और खराब मिट्टी व कम पानी में भी इसकी उपज अच्छी होती है । 

पर्यावरण को बचाने व स्वस्थ रहने के लिए साइकल का उपयोग करें ! विश्व साइकल दिवस

बचपन मे साइकल सीखने का बहुत उत्साह होता था । किसी तरह पूरी साइकल चलाना सीखे । सीखने के लिए कई पापड़ बेलने पड़े । क्योकि तब साइकल मिलती ही नहीं थी । 
जब हाई स्कूल पहुंचे तब साइकल स्वतंत्र रूप से मिली । खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था । 
जब से गाड़ी आई धीरे - धीरे साइकल छूटती चली गई । पर घर जब भी जाता कोशिश करता साइकल चलाने की । पापा की साइकल थी न उसी से तो सीखा था । 
तब ज्यादा कुछ फायदे नुकसान नहीं पता थे सिर्फ इतना पता था कि साइकल से जाएंगे पर जल्दी पहुचेंगे बस ।
अब जब इसी क्षेत्र में काम शुरू किए पर्यावरण पर ही ज्यादा काम करते हैं तब समझ आया कि साइकल तो हमारे स्वास्थ्य व पर्यावरण दोनो के लिए ही फायदेमंद है । 
हमे साइकल रोज चलाना चाहिए कोशिश तो ये होनी चाहिए को घर से आफिस अगर दूर न हो तो रोज आफिस भी साइकल से ही जाए
छोटे बड़े जो भी कार्य साइकल से हो सके उसमे साइकल का ही उपयोग करें । 
आज पर्यावरण की बहुत बड़ी समस्या है मौसम कब बदल जाए पता नहीं । प्रदूषण ने तो हालात ही बिगाड़ दिए है, जिसके कारण स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा हैं । बीमारियां बढ़ रही है ।
रोज नई नई बीमारियां जन्म ले रही हैं । हर एक का इलाज संभव नही है । हमे अपने शरीर को मजबूत बनाना होगा । और इसके लिए साइकलिंग से बेहतर कुछ नहीं । खर्च भी बचेगा पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी । प्रदूषण भी नही होगा । पेट्रोल खत्म होने का डर भी नही । #worldbicycleday2025 

Monday, 2 June 2025

ग्रामीण इंजीनियरिंग सबसे उम्दा

गांव में लोग अपनी जरूरत के हिसाब से अपनी व्यवस्थाएं बना लेते हैं । तकनीकी रूप से सक्षम होते हैं । ग्रामीण इंजीनियर कहना गलत नहीं होगा । 
गांव में कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं । 
कृषि से सम्बंधित तो अनेकों उदाहरण है । पानी संरक्षण के भी उदाहरण आप देखेंगे तो हैरान हो जाएंगे । 
ये तकनीक देखिए बरसात के पानी से घर डैमेज न हो जाए उसके लिए लकड़ी से निकासी की व्यवस्था बना दिए ।
शहरों में हर चीज का सीमेंटीकरण कर देने से भूजल स्तर में कमी होते जा रही है । 
लेकिन गांवों में भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए छोटे छोटे ही सही लेकिन कई तकनीक अपनाते है । जिससे भूजल स्तर सुरक्षित रहे । 
प्लास्टिक पाइप ने बहुत सारा पर्यावरणीय नुकसान किया है । कौन मेहनत करे बोल कर लोग अब व्यापारियों की ओर आकर्षित हो रहें है । और व्यापारी हर वो चीज बना कर बेच रहे हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुचाते हैं । 
इकोफ्रेंडली सामानों के उपयोग पर हम सबको बल देना चाहिए और पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वाले समानों का वहिष्कार करना चाहिए । 
ग्रामीण तकनीकों को प्रोत्साहित कर उन्हें संरक्षण देना होगा । गांव के लोगों को उनके इंजीनियरिंग को सम्मान देकर उन्हें बढ़ावा देना होगा ।

आम के पौधे का वृक्षारोपण अभियान

अनमोल फाउंडेशन इस साल अपने कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले के अम्बिकापुर व मैनपाट विकासखंड के 10 ग्रामों में 100 -100 आम के पौधे लगाने का निर्णय लिया हैं । जिसके लिए बीज एकत्र कर नर्सरी तैयार की जा रही है । 
फाउंडेशन अभियान चला कर बीज संग्रहण व नर्सरी का काम कर रही है । अपने द्वारा तैयार नर्सरी के पौधे गांव में समुदाय के सहयोग से रोपे जाएंगे ।
इसका उद्देश्य है कि लोगों को पर्यावरण के साथ आजीविका की सुविधा भी मिले । 
रोजगार के अवसर निर्मित करना 
जैविक फलों के उपयोग से स्वास्थ्य व पोषण अच्छा रहेगा 
इन्ही बातों को ध्यान में रखकर आम का प्लांटेशन की योजना तैयार की गई है । 
लोगों की भागीदारी से यह कार्य किया जा रहा है ।

Saturday, 31 May 2025

किचन गार्डेन के द्वारा आजीविका व स्वास्थ्य की सुरक्षा की बेहतरी के प्रयास

अनमोल फाउंडेशन अपने सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत कार्यक्षेत्र के उन महिलाओं को जिनके पास भूमि कम है। ऐसी सभी महिलाओं को किचन गार्डेन का प्रशिक्षण देकर उन्हें सब्जी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । 
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 
1- भूमिहीन परिवारों को आजीविका से जोड़ना 
2- महिलाओं और बच्चों को भोजन में अच्छी पौष्टिक सब्जी मिले जिससे स्वास्थ्य और पोषण अच्छा हो । 
3- पर्यावरण की सुरक्षा व बढ़ावा 
4- कम भूमि में भी सब्जी खेती हो सकती है, इस पर समझ बनाना
5- किचन वेस्ट का प्रबंध करना जैविक खाद तैयार कर ।
6- महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना 
किचन गार्डेन में नई तकनीकों का उपयोग जैसे मचान पद्धति, वर्टिकल गार्डेन, आदि के बारे में प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित किया गया है । 
फाउंडेशन यहां घर के अनुपयोगी सामानों का पुनः उपयोग करने के लिए भी जोर दे रहा है। 
महिलाएं रुचि लेकर किचेन गार्डेन में सब्जी खेती का काम करके घर के लिए अच्छी सब्जी उत्पादन कर रही हैं । जो सब्जी बाजार से लाने में खर्च होता था उसका बचत हो रहा है । 
अच्छी व पौष्टिक सब्जी खाने को मिल रहा है । महिलाएं उत्साहित है अगली बार से ज्यादा लगाएंगी ताकि बेचकर आय भी अर्जित कर सकें । 

Friday, 30 May 2025

जलभराव से परेशान रहवासी इससे निपटने नगर निगम के पास कोई प्लान नही

जल भराव हर बड़े शहरों की एक बड़ी समस्या है । दिल्ली मुंबई तो इसी के कारण हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं । लेकिन सरकारें आज तक इसका समाधान नहीं कर पाई । 
अब ये जलभराव की समस्या सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं है बल्कि ये छोटे -छीटे शहरों में भी हो रही हैं । जिसका समाधान छोटे शहरों के पास भी नही है 

आज सुबह जब रायपुर में थोड़ी तेज बारिश हुई तो हालात ऐसे हो गए । अगर मूसलाधार बारिश हो और लगातार हो तो क्या होगा आप अनुमान लगा सकते हैं । 
जल भराव मानव निर्मित समस्या है इसके पीछे कई कारण है जिनमे 
1- कचरे का उचित प्रबंधन न होना 
2- सड़क नालियां फुटपाथ सभी का कांक्रीटीकरण 
3- नालियों का योजनानुसार निर्माण का न होना 
4- सड़को व नालियों पर रहवासियों का बेतरतीब अवैध कब्जा 
5- बरसात के पूर्व जलभराव की कोई पूर्व तैयारी का न होना 
कोई विकराल घटना घटित न हो इसीलिए शासन को इस दिशा में कार्य करना चाहिए । 
जनभागीदारी से इस कार्य को बेहतर किया जा सकता है 

आजीविका के पारम्परिक तरीका व स्रोत पे बातचीत

छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासी बहुल जिला सरगुजा के मैनपाट विकासखंड अंतर्गत ग्राम करमहा में अनमोल फाउंडेशन के निदेशक संजय शर्मा लोगों से आजीविका के मुद्दे पर चर्चा करते हुए । 
मैनपाट विकासखंड का यह ग्राम चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है । यहां आने जाने के लिए कोई साधन नहीं है यहां पैदल ही जाना पड़ता है वो भी पहाड़ पार करके । फाउंडेशन का यहां लोगों से अच्छा जुड़ाव है । यहां पर कई काम हुए गए जिनमे भूमि समतलीकरण, मेड़बन्दी, चैकडेम, कुवां पक्का करण सब्जी खेती व राहत कार्य किया गया । 
आज संजय शर्मा जी लोगों के साथ पारम्परिक आजीविका के स्रोतों व संसाधनों को कैसे बढ़ावा दिया जाए इस विषय पर बातचीत कर रहे हैं ।
उनका मानना है कि लोगों के पास पारम्परिक अनुभव बहुत है उन्हें अगर बढ़ावा दिया जाएगा तो पर्यावरण को बिना क्षति पहुचाए विकास किया जा सकता है 

यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...