Wednesday, 25 June 2025

सीताफल के पेड़ में फल देख किसान प्रसन्न

कहते हैं न कि मेहनत का फल बड़ा मीठा होता है । यह बात बिल्कुल सच है .
यहां हमारे किसान भाई ने वृक्षारोपण अभियान में मिले पौधे का रोपण किया जो अब फल देने लगा है और सच यह फल बहुत ही मीठा होता है । 
वृक्षारोपण अभियान के तहत लगाया गया सीताफल अब फल देने के लिए तैयार हो गया है । अभी दो तीन फल लग गए है । 
अधिकांश जगह पर इसे सीताफल ही कहा जाता है लेकिन कई जगहों पर ये शरीफा के नाम से भी जाना जाता है । पकने के बाद खाने में बहुत मीठा लगता है। 
इसके फल में बीज की मात्रा अधिक होती है और आसानी से बीज उग भी जाते हैं । 
लोगों को अच्छे फल खाने को मिले और इसे बाजार में बेचकर आय अर्जित कर सके । इसलिए इसका वृक्षारोपण कराया जा रहा है । ये फल औषधीय गुणों से भरपूर है ।
सीताफल की तासीर ठंडी होती है। इसमें कैल्शिम और फाइबर जैसे न्यूट्रिएंट्स की मात्रा अधिक होती है जो आर्थराइटिस और कब्ज जैसी हेल्थ प्रॉब्लम से बचाने में मदद करता है। 
साथ ही इसके पेड़ की छाल में टैनिन होता है जिसका इस्तेमाल दवाइयां बनाने में होता है। इस पेड़ के पत्तों से कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता है। 
सीताफल ज्यादा उपयोग करने से यह मोटापे को बढ़ावा देता है सीताफल को सर्दी जुखाम में नहीं खाना चाहिए तथा इसे सुबह सुबह खाली पेट नहीं सेवन करना चाहिए सीताफल की तासीर ठंडी होने के कारण यह शरीर में सर्दी जुखाम को बढ़ावा देता है। 
पुराने समय में इसके बीजों को निकालकर और पीसकर इनकी बीजों को सर पर लगाया जाता था तथा जिससे सर के जुएं मर जाते हैं।

Tuesday, 24 June 2025

पारधी व बसोड़ समुदाय को मदद की जरूरत

बांस को भारत सरकार द्वारा खेती के रूप में लिया गया है। इसके लिए वित्तीय सहायता भी देने की योजना बनी बावजूद इसके बांस के काश्तकार पारम्परिक इंजीनियर संघर्ष कर रहे है । 
बांस के एक बढ़कर एक समान बनाते हैं हमारे गांव में रहने वाले पारधी व बंसोड़ समुदाय के लोग ।

इन समुदायों की बांस की जरूरत है ।इनके बनाएं हुए बांस के उत्पाद स्थानीय स्तर पर ही बिक जाते हैं । 
अगर इन्हें अच्छे बांस और बाजार की व्यवस्था मिले तो ये अच्छी आय अर्जित कर अपनी आजीविका सुदृढ कर सकते हैं ।
साथ देश के विकास में भागीदारी बन सकते हैं ।

Sunday, 22 June 2025

सरोधा दादर में बैगा परिवार के सौ प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे

कवर्धा जिले में बैगा परिवार के बच्चों के साथ पढ़ाई के सम्बंध में चर्चा करने के पश्चात एक सेल्फी । 
यहां सबसे अच्छी बात यह थी कि यहां सभी बच्चे स्कूल जाते हैं और अच्छी पढ़ाई करते हैं । 
ये सभी बच्चे प्राइमरी और मिडिल स्कूल के हैं । बैगा समुदाय केंद्र शेसन द्वारा विशेष संरक्षित जनजाति के अंतर्गत आता हैं । 

Thursday, 19 June 2025

सिंचाई हेतु मिट्टी के बांध का निर्माण

मैनपाट विकास खण्ड के ग्राम करमहा में जल प्रबंध हेतु छोटे बांध का निर्माण कर पानी संग्रहित किया गया । 
फाउंडेशन, ग्राम अधिकार मंच व जन भागीदारी से किया गया सफल प्रयास भूजल स्तर को बढ़ाने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा यह पानी सिंचाई के भी काम आ रहा है । 
सिंचाई की व्यवस्था होने से आसपास की भूमि में लोग सब्जी खेती कर अपनी आमदनी बाधा रहे हैं । 
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां बरसात का पानी रुकता ही नही बहकर सीधे नाले में चला जाता । 
लोगों की खेती बरसात के पानी पर ही निर्भर रहती है ।इस तरह के छोटे छोटे बांध बनने से बरसात के पानी को रोक कर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही सिंचाई की भी व्यवस्था सुनिश्चित होगी । 
इस प्रयास से गांव के लोग प्रसन्न है और भी ऐसे कार्य जल्द किए जाएंगे जिससे खेती से अच्छी आय प्राप्त हो सके । 

Tuesday, 17 June 2025

बांस बहुत ही उपयोगी है इसके कई फायदे हैं

बांस पहले तो जंगलों में ही होता था लेकिन इसकी जरूरत को देखते हुए लोग अपनी आवश्यकतानुसार अपने घरों में लगाने लगे फिर जैसे जैसे इसकी आवश्यकता बढ़ी और महत्व को समझने लगे तो इसकी खेती भी होने लगी  । 
गांव गांव में तो बांस के उपयोग की तरह से किए जाते है मिट्टी व घासफूस के घरों छतों को बनाने में । पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए घेरा बनाने में, बाउंड्री बनाने तथा दरवाजे के रूप में इसका ज्यादा उपयोग होता रहा । 

इसका कागज बनाया जाता है भोजन में भी लोग इश्तेमाल करते हैं कपड़े व सजावट के समान के रूप में भी उपयोग होने लगा है । इसके अलावा अब चारकोल व इथेनॉल भी बना रहे है । 
निर्माण:
  • बांस का उपयोग घरों, मचान, और अन्य संरचनाओं के निर्माण में किया जाता है, खासकर एशिया में जहाँ यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। 
  • यह लकड़ी और कंक्रीट जैसी पारंपरिक निर्माण सामग्री का एक पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।
  • बांस अपनी मजबूती, लचीलेपन और स्थायित्व के कारण एक उत्कृष्ट निर्माण सामग्री है, 
  • इसका उपयोग फर्श, फर्नीचर, और अन्य घरेलू सामान बनाने के लिए भी किया जाता है। 
भोजन:
  • बांस की कोमल टहनियाँ (शूट) कुछ संस्कृतियों में एक लोकप्रिय सब्जी हैं, खासकर चीनी व्यंजनों में. 
  • बांस के बीज को अनाज के रूप में खाया जाता है. 
  • पत्तियां पशुओं के लिए एक उपयोगी चारा हैं. 
  • बांस के पानी का उपयोग स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में किया जाता है। 
अन्य उपयोग:
  • बांस का उपयोग कागज और लुगदी बनाने के लिए किया जाता है. 
  • इसका उपयोग कपड़े, जैसे कि टी-शर्ट, पैंट, और मोज़े बनाने के लिए भी किया जाता है. 
  • बांस के रेशों का उपयोग बुलेटप्रूफ जैकेट सहित विभिन्न प्रकार के वस्त्रों में किया जाता है. 
  • बांस का उपयोग सजावटी उद्यान रोपण के लिए भी किया जाता है. 
  • यह मिट्टी के कटाव को रोकने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद करता है. 
  • बांस का उपयोग संगीत वाद्ययंत्र, जैसे कि बांसुरी, और कलात्मक वस्तुओं, जैसे कि कलम और चित्रकला, बनाने के लिए भी किया जाता है। 
बांस एक बहुमुखी और टिकाऊ पौधा है जिसके कई प्रकार के उपयोग हैं, जो इसे विभिन्न प्रकार के उद्योगों और अनुप्रयोगों के लिए एक मूल्यवान संसाधन बनाते हैं। 

Sunday, 15 June 2025

हेल्पेज इंडिया व सियान नागरिक एकता मंच द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

सियान नागरिक एकता मंच भिलाई व हेल्पेज इंडिया छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का आयोजन  सियान सदन वैशाली नगर भिलाई में 15 जून 2025 को किया गया  
उक्त कार्यक्रम में अनमोल फाउंडेशन के निदेशक संजय शर्मा  को बतौर अतिथि शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ । 
अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में उन्होंने माता पिता भरण पोषण अधिनियम 2007 के मुख्य कानूनी प्रावधानों व प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी साझा की । 
प्रश्नोत्तरी के दौरान लोगों के सवालों के उत्तर देकर उन्हें संतुष्ट भी किया और हर सम्भव सहायता का आश्वासन भी दिया ।
कार्यक्रम को हेल्पेज इंडिया के स्टेट हेड शुभांकर विस्वास व सियान नागरिक एकता मंच के सदस्य व पदाधिकारी शामिल रहे और अपनी बातों को रखा ।

Saturday, 14 June 2025

पारम्परिक खेती के मुद्दे पर किसानों से चर्चा

अनमोल फाउंडेशन के निदेशक कार्यक्षेत्र के गाँव सुमेला बहरा में किसानों से उनके मुद्दों पर बात करते हुए । 
फाउंडेशन पारम्परिक खेती को पारम्परिक पद्धति से बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही हैं । 
पारम्परिक बीज कुछ लोगों के पास ही उपलब्ध है इसलिए उसे संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए उसकी खेती कराने पर ज्यादा जोर दे रहे । 
अब धीरे धीरे लोगों को समझ आने लगा है कि हमारे पारम्परिक बीज उत्पादन कम देते थे लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद थे । ज्यादा उत्पादन के लालच में हम हानिकारक भोजन का सेवन कर रहे हैं । 
ऐसे में फाउंडेशन द्वारा पारम्परिक जैविक खेती को बढ़ावा देने से लोग खुशी खुशी जुड़ रहे हैं । 

यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...