Friday, 6 June 2025

जंगलों के बीच बसा गांव रेम्हला में

छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के एक ऐसे ग्राम में हैं इस समय जो जंगलों के बीच मे है । पकडण्डी सा रास्ता बाइक से पहुचे । यहां कोई वाहन नहीं आता जाता। कुछ भी लेना होता गांव के लोग पहाड़ से नीचे उतर कर जाते हैं लेने के लिए । 
गांव के समस्याओं पर चर्चा करते हुए , ग्रामीणों ने बताया कि आने जाने के लिए मार्ग श्रमदान से लोगों ने बनाया । सबसे बड़ी समस्या तो सड़क की ही है । 
पहुंच विहीन होने के कारण कई सुविधाएं नहीं पहुंच पाई है । शौचालय निर्माण के लिए सीमेंट और सीट तक ग्रामीणों को स्वंय लेकर ऊपर गांव तक जाना पड़ा । 

Thursday, 5 June 2025

वन आधारित आजीविका के स्रोतों में महुलान का महत्वपूर्ण योगदान

महुलान पत्ता वन आधारित आजीविका के स्रोतों में से एक है । गांव में लोग इसका खाना खाने के लिए पत्तल व बरसात के दिनों में छतरी व खुमरी बनाते है । इसके तने से बहुत ही मजबूत रस्सी बनती है ।
इसकी शासकीय स्तर पर खरीदी होती है। इसे बेचकर  ग्रामीण आय अर्जित करते हैं 

वनों के आसपास रहने वाले परिवारों को इस तरह के वन संसाधनों से कुछ आय हो जाती है जिससे उनके परिवार की आजीविका चलाने में मदद मिलती है। 

इस तरह के संसाधन अब धीरे धीरे समाप्त होते जा रहे हैं । इनके संरक्षण व संवर्धन की बहुत जरूरत है । ताकि वन क्षेत्र में रहने वाले गरीब ग्रामीण परिवारों को आजीविका के संसाधन मिल सके । 

Wednesday, 4 June 2025

पर्यावरण बचाने की चिंता में पूरा विश्व

आज विश्व पर्यावरण दिवस है, यह हर साल 5 जून को मनाया जाता है । इसका उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है ।
हर साल पर्यावरण दिवस की कोई न कोई थीम तय की जाती है । इस वर्ष प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करना थीम सुनिश्चित किया गया है । 
पर्यावरण की समस्या के कई कारण है जिनमें प्रमुख कारण :
1- वनों की अंधाधुंध कटाई 
2- औद्योगिकरण 
3- कांक्रीटीकरण का जाल 
4- प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग 
5- बढ़ती जनसंख्या 
6- रासायनिक तत्वों का उपयोग
आदि हैं 
अनमोल फाउंडेशन इस वर्ष आम का वृक्षारोपण कराने का निर्णय लिया । साथ मे कटहल, मुनगा आदि फलदार पौधे भी लगा रहे हैं । लेकिन उन सबमे सबसे ज्यादा आम का पौधा लगाया जा रहा है । 
पिछले वर्ष फाउंडेशन ने जंगल के पारम्परिक पौधों का बीज संग्रहित कर नर्सरी तैयार किए थे । उनका ही रोपण किया था 
अनमोल फाउंडेशन का मुख्य गोल ही पर्यावरण की सुरक्षा व बढ़ावा देना है । जिसे वह विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों के माध्यम से करने का प्रयास कर रही है जिसमे 
1-मिलेट्स की खेती 
2-फलदार पौधों का रोपण 
3-पारम्परिक पौधों का वनीकरण 
4- बीज बैंक 
5- जल प्रबंधन 
6- मिट्टी संरक्षण 
7- कचरा प्रबंधन 
8- प्लास्टिक मुक्त शहर 
आदि गतिविधियां संचालित कर रही है 
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर अनमोल फाउंडेशन सुमेला बहरा में जागरूकता, वृक्षारोपण, व स्वच्छता कार्यक्रम जनभागीदारी से कर रही है । 

Tuesday, 3 June 2025

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक व पर्यावरण का हितैषी मिलेट्स

मिलेट्स (Millets) मोटे अनाज होते हैं, यह अनाज एशिया और अफ्रीका के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाए जाते हैं. मिलेट्स को "श्री अन्न" के नाम से भी जाना जाता है. इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है । इसका उत्पादन पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा होता है ये कम पानी मे अच्छी उपज देते है । 
मिलेट्स कई प्रकार के होते हैं जिनमे ज्वार,बाजरा,रागी (मंडुआ), कुटकी,कोदो,सावा आदि शामिल है ।
मिलेट्स के बहुत से लाभ हैं 
1- मिलेट्स में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं
2-मिलेट्स पाचन में मदद करते हैं, वजन घटाने में मदद करते हैं और मधुमेह के लिए फायदेमंद होते हैं. 
3- मिलेट्स ग्लूटेन-मुक्त होते हैं, जो उन्हें सीलिएक रोग वाले लोगों के फायदेमंद है 
मिलेट्स को अब लोग अपने अपने तरीके से खाने में इश्तेमाल कर रहे हैं जिसमे 
1-ज्वार, बाजरा और रागी की रोटी 
2-बाजरा या रागी की खिचड़ी, पोहा 
3-मिलेट्स का पुलाव 
4-रागी की इडली
5-रागी का उपमा
6-मिलेट्स से बिस्किल व डेसर्ट भी बना रहे
7- मिलेट्स का सूप
लोग अपने अपने तरीके से उपयोग कर रहे हैं 
मिलेट्स (मोटे अनाज) को इसलिए महत्व दिया जा रहा है क्योंकि वे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, और खेती के लिए कम संसाधनों की आवश्यकता होती है. 
भारत में कृषि के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण योगदान है । पहाड़ी क्षेत्रों में कई समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण खाद्य है । सूखा और खराब मिट्टी व कम पानी में भी इसकी उपज अच्छी होती है । 

पर्यावरण को बचाने व स्वस्थ रहने के लिए साइकल का उपयोग करें ! विश्व साइकल दिवस

बचपन मे साइकल सीखने का बहुत उत्साह होता था । किसी तरह पूरी साइकल चलाना सीखे । सीखने के लिए कई पापड़ बेलने पड़े । क्योकि तब साइकल मिलती ही नहीं थी । 
जब हाई स्कूल पहुंचे तब साइकल स्वतंत्र रूप से मिली । खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था । 
जब से गाड़ी आई धीरे - धीरे साइकल छूटती चली गई । पर घर जब भी जाता कोशिश करता साइकल चलाने की । पापा की साइकल थी न उसी से तो सीखा था । 
तब ज्यादा कुछ फायदे नुकसान नहीं पता थे सिर्फ इतना पता था कि साइकल से जाएंगे पर जल्दी पहुचेंगे बस ।
अब जब इसी क्षेत्र में काम शुरू किए पर्यावरण पर ही ज्यादा काम करते हैं तब समझ आया कि साइकल तो हमारे स्वास्थ्य व पर्यावरण दोनो के लिए ही फायदेमंद है । 
हमे साइकल रोज चलाना चाहिए कोशिश तो ये होनी चाहिए को घर से आफिस अगर दूर न हो तो रोज आफिस भी साइकल से ही जाए
छोटे बड़े जो भी कार्य साइकल से हो सके उसमे साइकल का ही उपयोग करें । 
आज पर्यावरण की बहुत बड़ी समस्या है मौसम कब बदल जाए पता नहीं । प्रदूषण ने तो हालात ही बिगाड़ दिए है, जिसके कारण स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा हैं । बीमारियां बढ़ रही है ।
रोज नई नई बीमारियां जन्म ले रही हैं । हर एक का इलाज संभव नही है । हमे अपने शरीर को मजबूत बनाना होगा । और इसके लिए साइकलिंग से बेहतर कुछ नहीं । खर्च भी बचेगा पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी । प्रदूषण भी नही होगा । पेट्रोल खत्म होने का डर भी नही । #worldbicycleday2025 

Monday, 2 June 2025

ग्रामीण इंजीनियरिंग सबसे उम्दा

गांव में लोग अपनी जरूरत के हिसाब से अपनी व्यवस्थाएं बना लेते हैं । तकनीकी रूप से सक्षम होते हैं । ग्रामीण इंजीनियर कहना गलत नहीं होगा । 
गांव में कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं । 
कृषि से सम्बंधित तो अनेकों उदाहरण है । पानी संरक्षण के भी उदाहरण आप देखेंगे तो हैरान हो जाएंगे । 
ये तकनीक देखिए बरसात के पानी से घर डैमेज न हो जाए उसके लिए लकड़ी से निकासी की व्यवस्था बना दिए ।
शहरों में हर चीज का सीमेंटीकरण कर देने से भूजल स्तर में कमी होते जा रही है । 
लेकिन गांवों में भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए छोटे छोटे ही सही लेकिन कई तकनीक अपनाते है । जिससे भूजल स्तर सुरक्षित रहे । 
प्लास्टिक पाइप ने बहुत सारा पर्यावरणीय नुकसान किया है । कौन मेहनत करे बोल कर लोग अब व्यापारियों की ओर आकर्षित हो रहें है । और व्यापारी हर वो चीज बना कर बेच रहे हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुचाते हैं । 
इकोफ्रेंडली सामानों के उपयोग पर हम सबको बल देना चाहिए और पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वाले समानों का वहिष्कार करना चाहिए । 
ग्रामीण तकनीकों को प्रोत्साहित कर उन्हें संरक्षण देना होगा । गांव के लोगों को उनके इंजीनियरिंग को सम्मान देकर उन्हें बढ़ावा देना होगा ।

आम के पौधे का वृक्षारोपण अभियान

अनमोल फाउंडेशन इस साल अपने कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले के अम्बिकापुर व मैनपाट विकासखंड के 10 ग्रामों में 100 -100 आम के पौधे लगाने का निर्णय लिया हैं । जिसके लिए बीज एकत्र कर नर्सरी तैयार की जा रही है । 
फाउंडेशन अभियान चला कर बीज संग्रहण व नर्सरी का काम कर रही है । अपने द्वारा तैयार नर्सरी के पौधे गांव में समुदाय के सहयोग से रोपे जाएंगे ।
इसका उद्देश्य है कि लोगों को पर्यावरण के साथ आजीविका की सुविधा भी मिले । 
रोजगार के अवसर निर्मित करना 
जैविक फलों के उपयोग से स्वास्थ्य व पोषण अच्छा रहेगा 
इन्ही बातों को ध्यान में रखकर आम का प्लांटेशन की योजना तैयार की गई है । 
लोगों की भागीदारी से यह कार्य किया जा रहा है ।

यूथ चैंपियन–स्वराज संवाद

दिनांक: 22 सितंबर 2026 | माध्यम: ऑनलाइन प्रतिभागिता: 6 जिलों से 10 युवा बैठक का उद्देश्य “स्वराज के विचारों को कैसे मजबूत करें औ...