Thursday, 12 June 2025

प्राकृतिक जलस्रोतों का प्रबंधन

कार्यक्षेत्र में पहाड़ी पर बसे गावों में पीने के पानी के लिए लोग प्राकृतिक जलस्रोतों का उपयोग करते हैं या पहाड़ों से निकलने वाले पानी का उपयोग करते हैं । 
प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी एकदम साफ व पीने योग्य होता है लेकिन लोग वहीं कपड़ा भी साफ करते हैं । वहीं नहाते भी है जिससे पानी पीने लायक नहीं रह जाता ।

इसीलिए अनमोल फाउंडेशन ऐसे जलस्रोतों को स्वच्छता की दृष्टि से प्रबंधन कर उचित रखरखाव की व्यवस्था जनभागीदारी से कर रहा है । लोग भी फाउंडेशन जे साथ मिलकर पानी के उचित प्रबंधन पर सहयोग कर रहे हैं । 

Wednesday, 11 June 2025

बाल मजदूरी एक अभिशाप है हमे देश को बाल मजदूरी मुक्त बनाना है

युवाओं का वनों का बचाने के लिए आगे आना एक सकारात्मक संदेश है इस दिशा में जन संगठन ग्राम अधिकार मंच व अनमोल फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका है उन्हें प्रेरित करने में । 
देश के हर बच्चे का शिक्षित होना जरूरी है । बच्चे जब शिक्षित होंगे तो देश का हर वर्ग शिक्षित हो जाएगा । 
शिक्षित बच्चा ही कल युवा बनेगा और यही बच्चा व्यवसाय में नौकरी में राजनीति में उद्योग में कार्य करेगा तो देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा । 

गांव के युवा वन रक्षा दल बना वनों की करते हैं सुरक्षा

अनमोल फाउंडेशन द्वारा पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन अभियान के तहत कई तरह की गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं । 
फाउंडेशन  वृक्षारोपण, वनों को बचाना, कचरा प्रबंधन,  नो प्लास्टिक, जैविक खेती, मिलेट्स फार्मिंग आदि कार्यक्रम संचालित कर रही है। 
अनमोल फाउंडेशन अपने जन संगठन ग्राम अधिकार मंच से जुड़े युवाओं को वनों को बचाने के लिए प्रेरित कर तैयार किया है ।जो नए वन तैयार करने के लिए वृक्षारोपण तो करते ही हैं । साथ ही जहां वन उपलब्ध हैं उन्हें बचाने के लिए सतत निगरानी करते हैं ।
सुमेला बहरा के युवा सुबह शाम व रात में जंगल में भ्रमण कर निगरानी करते हैं । अपने गांव के किसी भी व्यक्ति को पेड़ काटने नहीं देते है और कोई बाहर का व्यक्ति पेड़ काटते पकड़ा जाता है उसे वन विभाग के कर्मचारियों को सुपुर्द कर देते हैं । 
युवाओं का वनों का बचाने के लिए आगे आना एक सकारात्मक संदेश है इस दिशा में जन संगठन ग्राम अधिकार मंच व अनमोल फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका है उन्हें प्रेरित करने में । 

Tuesday, 10 June 2025

घर के पीछे किचन गार्डेन पारम्परिक पद्धति

छत्तीसगढ़ के गांव में अपने घर के पीछे अपने बाड़ी में किचन गार्डेन करते हैं । सिंचाई की कोई व्यवस्था न होने से वे सिर्फ बरसात के दिनों में ही कुछ न कुछ बीज लगाते है । जैसे मक्का, बाजरा आदि और किनारे किनारे सब्जी लगा देते हैं । मक्के या बाजरे के बीच मे खीरा या बरबट्टी भी लगाते हैं 
अपनी क्षमता के अनुसार मिलेट्स व सब्जी की पैदावार करते है । सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये सभी बीज पारम्परिक व जैविक बीज होते हैं । 
खेती भी पारम्परिक पद्धति से ही कि जाती है वह भी गोबर के खाद से बिना दवाई का प्रयोग किए । 100 शुद्ध होता है ये फसल ।
अनमोल फाउंडेशन गांवों के इसी पारम्परिक बीजों व पारम्परिक पद्धति को बढ़ावा दे रही है. बीजों को संरक्षित कर उनके उपयोग को बढ़ावा देने का कार्य ग्रामीणों के साथ मिलकर कर रही है । ताकि जैविक पारम्परिक बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। लोगों को शुद्ध व पौष्टिक भोजन मिल सके

Monday, 9 June 2025

समस्याओं को समझने हेतु ग्राम भ्रमण

कार्यक्षेत्र में विजिट कर लोगों की समस्याओं की समस्याओं के समाधान के उपायों पर चर्चा करने से पूर्व गांव का एक विजिट करते हुए अनमोल फाउंडेशन के निदेशक संजय शर्मा ।
किसी मुद्दे पर चर्चा से पूर्व अगर वस्तुस्थिति को स्वयं अपनी आंखों से देख लिया जाए तो रणनीति बनाने में आसानी होती है
इसी बात को ध्यान में रखकर लोगों के साथ गांव का भ्रमण कर देखने का प्रयास कहां पर क्या समस्या है और उसका क्या निदान हो सकता है । 

Sunday, 8 June 2025

दुनिया का सबसे महंगा आम मियांजाकी रायपुर के आम महोत्सव में

मियांजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम ।इसका अंतराष्ट्रीय बाजार में मूल्य 2,70,000 रुपए प्रति किलोग्राम है। इस समय इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के मंडपम हाल में आम महोत्सव के आयोजन में प्रदर्शनी में रखा गया है ।
यह आम सुंदर और सुगंधित है । यह योकोहामा (मियांजाकी) जापान का मूल है । इसे छत्तीसगढ़ ने कमलपुर फार्म्स,कमलपुर जिला सूरजपुर छ. ग. में उत्पादित किया गया है । 
आम महोत्सव में यह आकर्षक का केंद्र बना हुआ है हर कोई इसे अपने कैमरे में कैद कर रहा है ताकि यादगार के तौर पर रख सके । 
एक और आम है जो साइज व वजन के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है वो है हाथझूल बीजापुर में उत्पादित यह आम 1800 ग्राम का है। साइज देखकर ही लोग आकर्षित हो रहे हैं । 

Saturday, 7 June 2025

देशी फलों में एक फल जामुन, मीठा भी सेहतमंद भी

कभी गांव के बगीचे की शान होती थी जामुन । उस समय हमारे पूर्वज हर चीज घर मे उपलब्ध हो इसके लिए फलदार वृक्ष खूब लगाते थे । जिससे पूरे परिवार को हर फल घर मे ही खाने को मिल जाए ।
देशी फल ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होता है, ऐसा मेरा मानना है। औषधि विशेषज्ञ भी मानते ही होंगे । हमारे देश का हर फल औषधीय गुणों से भरपूर है । 
इसी फलों में एक फल जामुन भी है गांव में आम के 10 पेड़ होंगे तो 1 जामुन का जरूर होगा । इसकी संख्या कम क्यों होती थी ये तो पता नही । पर शायद पसंद न पसंद से होगा । या कोई और बात होगी यह अध्ययन का विषय जरूर होगा । 
परन्तु उन फलदार पौधों में जामुन होता जरूर था । अब संख्या कम होती जा रही है इसके कई कारण है जिन पर अलग से चर्चा करेंगे । 
अन्य फलदार पौधों की तरह जामुन में भी कई पोषक तत्व व औषधीय गुण है जो शरीर को फायदा पहुचाते है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जामुन से ब्लड सुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। हृदय की अच्छा किया जा सकता है । 
पाचन क्रिया को बेहतर बना सकते हैं। वजन कम किया जा सकता है शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बधाई जा सकती है । 
शहरों में तो मिलता जरूर है लेकिन इतना महंगा की हर कोई इसे ले नहीं सकता ।
अनमोल फाउंडेशन गांव स्तर पर फलदार पौधों को लगाने पर जोर दे रही है ताकि लोगों की आजीविका के साथ साथ उनका स्वास्थ्य भी अच्छा हो सके । 

खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता

Writing खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता 📍 जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS), गनियारी, बिलासपुर, छत्...