Thursday, 17 July 2025

आय को बढ़ाने किसानों से चर्चा

किसानों के साथ चर्चा कर जानकारी लेते हुए अनमोल फाउंडेशन के CEO संजय शर्मा । 
सिंचाई की समस्या व फसलों के उत्पादन पर बात कर लोगों के अनुभवों के बारे में जाना । 
संजय शर्मा ने त्वरित उत्पादन व आय देने वाली फसलों व कम भूमि वाले किसानों को मिश्रित फसल के सम्बंध में जानकारी साझा की और अपने अनुभव साझा किए । 
पम्पापुर के कोलता पारा के किसानों ने भी खुलकर अपनी बातें रखी व पूर्व में संजय शर्मा के सहयोग से नाले पर बनाए गए चेकडैम के टूट जाने से होने वाली नुकसान पर चर्चा करते हुए उसे फिर से बनाने में मदद करने की मांग रखी ।

Tuesday, 15 July 2025

कुपोषण दूर करने पोषण वाटिका अभियान

सब्जियों के बीज अंकुरित होने लगे हैं और जल्द ही रोपाई के लिए तैयार हो जाएंगे।

अनमोल फाउंडेशन पोषण वाटिका अभियान के तहत वंचित एवं आर्थिक रूप से पिछड़े समुदाय के परिवारों के साथ अभियान चलाकर सब्जी की खेती को बढ़ावा दे रहा है।
इस अभियान के तहत घर के आसपास सब्ज़ियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए लोगों को सब्ज़ियाँ दी जा रही हैं। बाकी प्रक्रियाएँ समुदाय के सहयोग से पूरी की जा रही हैं।
फाउंडेशन का उद्देश्य है:
1- समुदाय को सब्जियों के रूप में पौष्टिक भोजन मिले।
2- सभी का स्वास्थ्य बेहतर हो।
3- बच्चों और महिलाओं को सब्जियों से पोषक तत्व मिलें।
4- कोई भी कुपोषण का शिकार न हो।
इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, फाउंडेशन लोगों से सब्जियां उगाने और उन्हें अपने आहार में शामिल करने का आग्रह कर रहा है।

Monday, 14 July 2025

बच्चों को प्रेरित करने के लिए जुड़ाव जरूरी

बच्चों से बातें करना, उनकी भावनाओं को समझना, उन्हें मानसिक व शारिरिक विकास के लिए प्रेरित करना । 
इसके लिए जरूरी है कि आप स्वंय बच्चे बन जाइए । जब आप उनके जैसा बन जाएंगे तो वे आपको फॉलो करेंगे । 
जब फालो करेंगे तब आप वह गतिविधि करें जो उनके शारिरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी हैं । 
यह भी जरूरी है कि कौन बच्चा किस चीज में रुचि ले रहा हैं उसे उसी काम के लिए प्रोत्साहित किया जाए। 
जब हम हर वक्त पढ़ाई पढ़ाई की ही बातें करते हैं तो बच्चे बोर हो जाते हैं और रुचि कम लेते हैं। 
हमे उनके पढ़ाई को रुचिकर बनाने के लिए खेल या मनोरंजन को जोड़कर शिक्षा देनी चाहिए । 
आजकल स्कूलों में यह पद्धति अपनाई जा रही है जो कि सराहनीय है ।
शिक्षक और बच्चे के का जुड़ाव बहुत महत्वपूर्ण है बच्चे भविष्य को बेहतर बनाने में 

Sunday, 13 July 2025

सुविधा सम्पन्न कृषक उत्पादन ले पैसे काम रहे, लघु कृषक अब फसल लगा रहे

मक्के का सीजन चल रहा है, बड़े किसान पहले ही इसकी खेती शुरू कर दिए थे । सुविधा सम्पन्न कृषक हैं वे पहले खेती किए थे उनके फसल तैयार हो गए हैं और बाजार में बिकने आ गए । 
लेकिन हमारे जो लघु कृषक हैं जिनके पास सुविधाओं का आभाव है वे अब मक्के किए फसल लगाए हैं।
अभी पौधे छोटे - छोटे है तभी पत्ते पर कीड़े लग गए है वे पत्ते खा जा रहे । चिंतित किसान के साथ मीटिंग कर उन्हें जैविक दवाइयों निमाष्ट, बर्माष्ट आदि के बारे में जानकारी दी और उनकी मदद करने के लिए अपने सहयोगी को कहा। 
चूंकि किसान पूरी फसल जैविक तरीके से की है तो रासायनिक दवाइयां नही बता सकते ।
वैसे भी हम जैविक खेती को ही बढ़ावा देते है । जहर मुक्त खेती हो ऐसा हम अपने से जुड़े किसानों को तैयार कर रहे हैं। 

Saturday, 12 July 2025

बांस के पारम्परिक उद्योग समस्याओं से जूझ रहे

छत्तीसगढ़ में बांस के बने सामानों की मांग अच्छी है । बंसोड़ व पारधी समुदाय सिर्फ और सिर्फ बांस का ही कार्य करते हैं । 
जैसे जैसे जंगल कम होते गए इन समुदायों का काम भी प्रभावित होता गया ।
अब इनके काम बहुत ही कम हो गए है । इसके मुख्य दो कारण है ।
एक बांस का कम होना 
आर्थिक स्थिति ठीक न होना 
जंगलों में बांस कटते जा रहे हैं जिससे अब बांस आसानी से नहीं मिलता विभाग भी इन्हें बांस उपलब्ध नहीं करा पाता । 
बाहर से अगर बांस खरीदते हैं तो वो महंगा मिलता है लाने ले जाने में खर्चे लगते हैं उसके लिए पैसा होना चाहिए । जिसकी इन समुदायों के पास कमी होती है। 
इनकी आजीविका का मुख्य स्रोत यही है इन्हें अगर आगे बढ़ाना है तो इन्हें सहयोग की जरूरत है ।
वैसे तो अब बांसों से बहुत से सामान बनने लगे हैं । शायद बड़ी बड़ी कंपनियां इसमे कपड़े चारकोल आदि बनाने के लिए आ रही हैं । 
जब बड़े बड़े व्यापारी बांस खरीद कर ले जाएंगे तो स्थानीय स्तर पर बांस की समस्या खड़ी होगी जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव इन समुदायों पर पड़ेगा ।
ये समुदाय परम्परागत रूप से इसी काम को करते आ रहे हैं । बड़े व्यापारियों के इस क्षेत्र में आने से इन समुदायों का रोजगार ही मारा जाएगा। 

Friday, 11 July 2025

शुद्ध देशी जंगली पौधों की नर्सरी

शुद्ध रूप से देशी व जंगली पौधों की नर्सरी । परन्तु ये सभी पौधे उनके बीजों से तैयार किए जा रहे हैं। जिन्हें वनोपज कहा जाता है । इनमे कुछ फलदार पौधों के बीज भी लगाए गए है । जिनमे आम, कटहल और जामुन भी शामिल है। इसमे सबसे ज्यादा आम, कटहल और महुआ के पौधे हैं। 
इस छोटे से क्षेत्र में 1000 पौधे के लिए बीज लगाए गए है । जैसे ही ये बीज पौधे का रूप ले लेंगे। इन्हें आसपास के 10 ग्रामों में समुदायों सहभागिता से रोपण किया जाएगा । पौधे से पेड़ बनने तक के सुरक्षा व देखरेख की जिम्मेदारी समुदाय की होगी ।
जब ये फल देने लगेंगे तो समुदायों के स्वास्थ्य, पोषण व आजीविका के लिए महत्वपूर्ण साधन बनेंगे । 

Thursday, 10 July 2025

बरसात में जलाऊं लकड़ी को पारम्परिक तरीके से सुरक्षित रखते है गांव के लोग

बरसात के दिनों में जलाऊं लकड़ी की दिक्कतें होंगी इसीलिए ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊं लकड़ी एकत्र कर सुरक्षित रख दिए हैं ताकि ईंधन के भीगने का डर न रहे । 
आपमे जरूरत के चीजों को कैसे सुरक्षित रखना है ये बखूबी जानते हैं । क्योंकि ये ज्ञान इन्हें अपने पूर्वजों से मिला है । 
बरसात में सारी लकड़ियां भीग जाती है जिसमे आग नहीं लगता । वर्षा के पूर्वानुमान के हिसाब से पूरे बरसात भर के लिए हर परिवार जलाऊं लकड़ी संग्रहित कर अपने अपने घरों के पास सुरक्षित जगह पर स्टोर कर देते हैं ताकि बरसात के पानी मे न भीग जाएं ।

गांव में अभी भी अधिकांश परिवार लकड़ी के चूल्हे में ही भोजन बनाते हैं । इतनी महंगी गैस लेने की आर्थिक क्षमता नहीं हैं। 
इसलिए भोजन बनाने के लिए जंगलों के किनारे से सूखे जलाऊं लकड़ी एकत्र कर ईंधन की व्यवस्था करते हैं । 

खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता

Writing खाद्य सहायता के डिजिटलीकरण एवं खाद्य सुरक्षा पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता 📍 जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS), गनियारी, बिलासपुर, छत्...